विधानसभा अध्यक्ष देवनानी को संस्कृत काव्यग्रंथ ‘संजीवनी शतक’ भेंट

विधानसभा अध्यक्ष देवनानी को संस्कृत काव्यग्रंथ ‘संजीवनी शतक’ भेंट

​जयपुर | 19 जनवरी 2026

| नरेश गुनानी

​राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को रविवार को संस्कृत के नवीन काव्यग्रंथ ‘संजीवनी शतक’ की प्रति भेंट की गई। इस ग्रंथ की रचना बिलोंची स्थित राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय के आचार्य पण्डित रामस्वरूप दोतोलिया द्वारा की गई है।

​भक्ति और शास्त्रीय चेतना का संगम

​यह कृति सालासर बालाजी हनुमान के स्वरूप, सेवा, शौर्य, त्याग और अटूट श्रद्धा को समर्पित है। सालासर बालाजी की भक्ति परंपरा में जो लोक आस्था और शास्त्रीय गरिमा का समन्वय मिलता है, उसे इस ग्रंथ में संस्कृत की भावपूर्ण और सशक्त काव्य शैली में पिरोया गया है।

​ग्रंथ की मुख्य विशेषताएँ

​‘संजीवनी शतक’ केवल एक स्तुति-काव्य नहीं है, बल्कि यह पाठक के जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करने वाला माध्यम है। ग्रंथ के मुख्य आकर्षण निम्नलिखित हैं:

  • ​ऐतिहासिक एवं पावन प्रसंग: इसमें सालासर धाम का महत्व, महर्षि दधीचि का त्याग, और सालासर बालाजी के संस्थापक मोहनदास महाराज के जीवन प्रसंगों का वर्णन है।
  • ​सांस्कृतिक वर्णन: ग्रंथ में दधिमति माता के पावन चरित्र और सालासर बालाजी के दिव्य स्वरूप का काव्यात्मक चित्रण किया गया है।
  • ​संपादन: इस विशिष्ट ग्रंथ का संपादन मिताक्षरी दोतोलिया एवं सोमप्रभा दोतोलिया द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया है।

​गरुमामयी उपस्थिति

​इस अवसर पर आध्यात्मिक और राजनीतिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियाँ उपस्थित रहीं, जिनमें विधायक बालमुकुंदाचार्य और नीरज वशिष्ठ सहित अन्य प्रबुद्ध जन शामिल थे। वक्ताओं ने इस कृति को संस्कृत साहित्य की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए इसकी सराहना की।

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