विद्याभारती प्रतिभा सम्मान: राज्यपाल ने नवनियुक्त IAS-RAS अधिकारियों को सराहा; बोले— “प्रशासनिक अधिकारी गांव और गरीब के कार्यों को दें प्राथमिकता”

नरेश गुनानी 

जयपुर, 17 मई 2026।

​विद्याभारती, राजस्थान द्वारा आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने नवनियुक्त प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षकों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। राज्यपाल ने स्पष्ट कहा कि नए भारत के निर्माण का असली अर्थ गांव, गरीब, आदिवासी और घुमंतू समाज के लिए समय निकालना और उनके कार्यों को प्राथमिकता देना है।

​समारोह में राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के 59 और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 3 नवनियुक्त अधिकारियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

​ राज्यपाल के संबोधन के मुख्य बिंदु: “झोपड़ी से महल तक की यात्रा शिक्षा से ही संभव”

  • कमजोर वर्ग को मिले प्राथमिकता: राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक पदों पर चयनित अधिकारियों को पिछड़े और कमजोर वर्ग के लोगों की समस्याओं के समाधान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। गरीब की सेवा से ही जीवन में दुआएं और वास्तविक नाम मिलता है।
  • शिक्षकों से मानसिकता बदलने का आह्वान: प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को अपनी मानसिकता में बदलाव लाकर देश के बच्चों को प्रतिभाशाली और संस्कारी बनाने के लिए कार्य करना चाहिए। शिक्षा ही समाज और राष्ट्र में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
  • मैकाले की गुलाम मानसिकता से मुक्ति: देश में लॉर्ड थॉमस मैकाले ने ऐसी शिक्षा के बीज बोए जिससे सदा गुलाम मानसिकता बनी रहे। हालांकि, अब नई शिक्षा नीति (NEP) से इस गुलाम मानसिकता से मुक्ति की राह निकली है। विद्यार्थियों के मन में नैतिकता का प्रसार होना जरूरी है।
  • विद्याभारती का योगदान: वर्ष 1952 से ही विद्याभारती देश में आदर्श संस्कारों, नैतिक मूल्यों और शिक्षा के प्रसार में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

​ मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी के प्रशासनिक गुरुमंत्र:

​कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने नवनियुक्त अधिकारियों को सेवा के दौरान जमीन से जुड़े रहने के महत्वपूर्ण मंत्र दिए:

  • विनम्रता से छुएंगे शिखर: प्रशासनिक सेवा में अधिकारियों को सदा विनम्र रहना चाहिए, इसी से वे भविष्य में उच्चतम शिखर पर पहुंच सकेंगे।
  • अंतिम छोर के व्यक्ति की सुनें आवाज: कतार के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की आवाज सुनना और विविधता को अंगीकार करते हुए गांव व शहर के लोगों की समस्याओं का प्रभावी समाधान करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
  • तारीफ और खुशामद में समझें अंतर: अधिकारियों को अपने आस-पास के वातावरण को समझते हुए लोगों की आवश्यकता के अनुसार काम करना चाहिए और चापलूसी (खुशामद) व वास्तविक तारीफ के बीच अंतर पहचानना चाहिए। इससे प्रशासनिक सेवाओं के प्रति जनता का विश्वास बना रहेगा।

​ गरिमामयी उपस्थिति

​समारोह की शुरुआत में चंद्रशेखर गौड़ ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी। इस विशेष अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक निंबाराम, विद्याभारती के अखिल भारतीय मंत्री शिवप्रसाद और डॉ. जी. एल. शर्मा सहित कई गणमान्य जन उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने नवनियुक्त अधिकारियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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