विदेशी वस्तुओं की होली जलाकर स्वदेशी अपनाने का संकल्प — स्वदेशी जागरण मंच ने जताया विरोध, ‘स्वदेशी अपनाओ, विदेशी भगाओ’ के लगे नारे
(रिपोर्ट: हरिप्रसाद शर्मा, अजमेर)
Edited By: नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जून 01,2025
अजमेर। ऑपरेशन सिंदूर के बाद देशभर में राष्ट्रवाद की भावना और तेज हो गई है। इसी कड़ी में रविवार को स्वदेशी जागरण मंच, अजमेर द्वारा बजरंगगढ़ चौराहा स्थित विजय स्मारक पर एक विशेष विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया, जिसमें विदेशी वस्तुओं की प्रतीकात्मक होली जलाकर उन देशों के खिलाफ रोष प्रकट किया गया जिन्होंने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पाकिस्तान का समर्थन किया है।
इस आयोजन का नेतृत्व मंच के संयोजक डॉ. संत कुमार ने किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जनता में स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने और विदेशी उत्पादों का बहिष्कार करने की चेतना जाग्रत करना था। डॉ. संत कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि “भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में जो पराक्रम दिखाया है, उसके बाद हमारा नैतिक कर्तव्य बनता है कि हम उन देशों के उत्पादों का त्याग करें जो भारत विरोधी ताकतों का समर्थन कर रहे हैं।”
विरोध का केंद्र — चीन, तुर्की और उज्बेकिस्तान
डॉ. कुमार ने स्पष्ट रूप से कहा कि चीन, तुर्की और उज्बेकिस्तान जैसे देशों ने पाकिस्तान का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन किया है, इसलिए ऐसे देशों के उत्पादों का बहिष्कार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि “राष्ट्रभक्ति सिर्फ भावनाओं की बात नहीं है, अब उसे हमारे क्रियात्मक जीवन में भी दिखाई देना चाहिए।”
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को याद दिलाते हुए कहा कि “यह विरोध प्रदर्शन उस विचारधारा को मजबूत करने का प्रयास है जिसमें स्वदेशी को बढ़ावा देना और विदेशी निर्भरता को कम करना ही राष्ट्रहित का मार्ग है।”
जनसमूह ने ली बहिष्कार की शपथ
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, व्यापारी वर्ग, युवा और समाजसेवी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर शपथ ली कि वे विदेशी वस्तुओं का त्याग करेंगे और अपने परिजनों व साथियों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। कार्यक्रम में ‘स्वदेशी अपनाओ, विदेशी भगाओ’, ‘भारत माता की जय’, ‘चीन-तुर्की होश में आओ’ जैसे नारे गूंजते रहे।
बाज़ार से सीमा तक: राष्ट्ररक्षा का नया दृष्टिकोण
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि देश की रक्षा केवल सीमा पर तैनात सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक उपभोक्ता का भी दायित्व है कि वह अपनी खरीदारी के माध्यम से यह तय करे कि उसके पैसों का उपयोग किन ताकतों को बल दे रहा है।
उन्होंने बताया कि विदेशी उत्पादों के स्थान पर स्वदेशी विकल्पों को अपनाकर हम अपनी अर्थव्यवस्था को सशक्त बना सकते हैं और राष्ट्रविरोधी शक्तियों को आर्थिक चोट पहुँचा सकते हैं। यह आर्थिक राष्ट्रवाद ही आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
अजमेर में आयोजित यह प्रतीकात्मक विदेशी वस्तुओं की होली न केवल एक सांकेतिक विरोध था, बल्कि यह एक वैचारिक आंदोलन की शुरुआत भी है। स्वदेशी जागरण मंच द्वारा चलाया गया यह अभियान उन सभी नागरिकों को प्रेरणा देता है जो अपने देश की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता के लिए सचेत हैं।
यह संदेश अब हर गली, हर घर और हर बाजार तक पहुंचाने की आवश्यकता है कि “देश की सेवा सिर्फ बंदूक से नहीं, बटुए से भी की जा सकती है।“