विदेशी मुद्रा भंडार: दुनिया के 10 ‘कुबेर’ देश और भारत की चुनौती, क्यों अरबों डॉलर भी पड़ रहे कम?

गौरव कोचर 

नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था में किसी भी देश की ताकत उसके ‘विदेशी मुद्रा भंडार’ (Foreign Exchange Reserves) से मापी जाती है। संकट के समय यही भंडार ढाल बनकर काम करता है। वर्तमान में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 690 अरब डॉलर के आसपास है, जो दुनिया के चुनिंदा बड़े भंडारों में से एक है। लेकिन, हालिया पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मितव्ययिता’ (Austerity) की अपील ने एक नई बहस छेड़ दी है: क्या भारत का यह विशाल भंडार वाकई काफी है?

दुनिया के 10 सबसे बड़े विदेशी मुद्रा भंडार वाले देश (मई 2026 के अनुमानित आंकड़े)

​चीन और जापान जैसे देशों के मुकाबले भारत की स्थिति को इस तालिका से समझा जा सकता है:

रैंक

देश

विदेशी मुद्रा भंडार (अनुमानित अरब डॉलर में)

1

चीन

$3,411

2

जापान

$1,383

3

स्विट्जरलैंड

$890

4

भारत

$690

5

रूस

$610

6

ताइवान

$570

7

सऊदी अरब

$450

8

हांगकांग

$442

9

दक्षिण कोरिया

$420

10

ब्राजील

$367

भारत के अरबों डॉलर ‘कम’ क्यों पड़ रहे हैं?

​दिखने में 690 अरब डॉलर की राशि बहुत बड़ी है, लेकिन भारत की आर्थिक संरचना और जरूरतों के कारण यह हमेशा दबाव में रहती है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

1. तेल और सोने की भारी भूख

भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। यदि खाड़ी देशों में तनाव से तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल पार करती हैं, तो भारत का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खाली होने लगता है। इसके अलावा, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है, जिसके आयात के लिए डॉलर चुकाने पड़ते हैं।

2. आयात कवर (Import Cover) का गणित

किसी देश के पास कितना भंडार है, उससे ज्यादा जरूरी यह है कि वह कितने महीनों के आयात का खर्च उठा सकता है।

  • ​वर्तमान में भारत का भंडार करीब 9 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है।
  • ​तुलनात्मक रूप से, स्विट्जरलैंड और जापान जैसे देशों का भंडार उनके कई वर्षों के आयात को कवर कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सुरक्षित स्थिति के लिए यह कवर कम से कम 12 महीने होना चाहिए।

3. रुपए को बचाने की जद्दोजहद

जब भी वैश्विक अस्थिरता आती है, विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालने लगते हैं। ऐसे में रुपए की वैल्यू गिरने लगती है। रुपए को स्थिर रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को अपने भंडार से डॉलर बेचने पड़ते हैं। हालिया ईरान-इजरायल तनाव के दौरान, भारत ने अपने भंडार से लगभग 38 अरब डॉलर गंवाए हैं।

4. विदेशी कर्ज और देनदारियां

भारत पर अल्पकालिक विदेशी कर्ज और डेरिवेटिव से जुड़ी देनदारियां भी काफी अधिक हैं। 690 अरब डॉलर में से एक बड़ा हिस्सा इन देनदारियों को चुकाने के लिए ‘रिजर्व’ रखना पड़ता है, जिससे शुद्ध उपयोग योग्य राशि कम हो जाती है।

आगे की राह: पीएम मोदी की अपील का संदेश

​प्रधानमंत्री ने हाल ही में नागरिकों से गैर-जरूरी विदेश यात्रा टालने और सोने की खरीद कम करने का आग्रह किया है। सरकार ने सोने पर कस्टम ड्यूटी भी बढ़ा दी है। इन कदमों का उद्देश्य डॉलर की निकासी को रोकना है ताकि भारत का ‘आपातकालीन कोष’ सुरक्षित रहे और देश को 2013 जैसी स्थिति (जब भंडार बहुत नीचे गिर गया था) का सामना न करना पड़े।

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