- पेंशन, जीपीएफ और कोषालय से जुड़े मामलों के समयबद्ध निस्तारण और बिलों के त्वरित भुगतान के निर्देश
- निरीक्षण के दौरान लाइव कॉल्स सुनकर परखी संवाद की गुणवत्ता, परिवादियों से सीधा फीडबैक लेने पर जोर
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल: सचिव स्तर के अधिकारी सीधे कंट्रोल रूम पहुंचकर कर रहे जनसुनवाई
जयपुर, 1 जून। नरेश गुनानी
वित्त विभाग की विशिष्ट शासन सचिव (बजट) शिवांगी स्वर्णकार ने सोमवार को शासन सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क (181) हेल्पलाइन केंद्र का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वित्तीय, पेंशन और प्रशासनिक स्तर की शिकायतों के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण समाधान के लिए पूरे सिस्टम को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। स्वर्णकार ने केंद्र के विभिन्न काउंटर्स का जायजा लेकर वहां कार्यरत कॉल सेंटर एग्जीक्यूटिव्स के कार्य की सराहना की और जन शिकायतों के पंजीकरण की संपूर्ण तकनीकी प्रक्रिया को विस्तार से समझा।
लाइव कॉल्स से परखी संवाद की गुणवत्ता
निरीक्षण के दौरान विशिष्ट शासन सचिव ने मौके पर लाइव कॉल्स के माध्यम से आमजन और ऑपरेटरों के बीच होने वाले संवाद की गुणवत्ता को परखा। उन्होंने रिस्पॉन्स टीम के प्रतिनिधियों को और अधिक संवेदनशीलता के साथ आमजन की समस्याएं सुनने तथा त्वरित रिस्पांस देने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि दूर-दराज से फोन करने वाले नागरिकों को राहत महसूस हो।
वित्तीय व पेंशन प्रकरणों के सरलीकरण पर विशेष बल
शिवांगी स्वर्णकार ने वित्त, पेंशन और कोषालय (ट्रेजरी) से संबंधित लंबित प्रकरणों की गहन समीक्षा की। उन्होंने विभिन्न विभागों से प्राप्त मामलों, विशेष रूप से सेवानिवृत्त राजकीय कार्मिकों के जीपीएफ (GPF), उपार्जित अवकाश (प्रिविलेज लीव) और पेंशन लाभ से जुड़े संवेदनशील मामलों के निस्तारण की गति को और तेज करने के कड़े निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी या प्रशासनिक स्तर पर आने वाले आक्षेपों (ऑब्जेक्शन्स) का बिना किसी विलंब के त्वरित निराकरण किया जाए और बिलों का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित हो, ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों और आम परिवादियों को उनके न्यायोचित लाभ अविलंब और सुगमता से मिल सकें। इस दौरान सब्जेक्ट रिवीजन, लेवल मैपिंग एवं कैटेगरी निर्धारण की प्रक्रिया को तकनीकी रूप से सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया।
फीडबैक और विनम्र संवाद के निर्देश
विशिष्ट शासन सचिव ने कॉल सेंटर प्रबंधन को निर्देशित किया कि किसी भी समस्या का समाधान होने पर परिवादी से दोबारा बात कर उनका फीडबैक अनिवार्य रूप से लिया जाए। यदि किसी जटिल तकनीकी कारण, नियम या बजट उपलब्धता की वजह से काम संभव नहीं है या उसमें समय लगने की संभावना है, तो इसकी सूचना भी पूरी विनम्रता के साथ परिवादी को समय पर दी जाए ताकि वे असमंजस में न रहें।
परिवादियों से सीधा संवाद कर जानी जमीनी हकीकत
निरीक्षण के दौरान शिवांगी स्वर्णकार ने स्वयं कॉल सेंटर के माध्यम से मनोज बंसल, दिनेश कुमार श्रीमाली, मुकेश, महावीर सहित अन्य परिवादियों से फोन पर सीधा संवाद किया। उन्होंने उनके प्रकरणों को विस्तार से सुना और मौके पर मौजूद अधिकारियों को उनके त्वरित समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।
मुख्यमंत्री की अभिनव पहल से आ रहा पारदर्शिता में सुधार
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विशेष निर्देशानुसार आमजन की शिकायतों के त्वरित व पारदर्शी निस्तारण के लिए सभी विभागों के सचिव स्तर के अधिकारी निर्धारित तिथियों पर राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) कंट्रोल रूम में स्वयं उपस्थित हो रहे हैं। इस अनूठी पहल के माध्यम से राज्य के नागरिक बिना किसी दफ्तर के चक्कर काटे, घर बैठे ही अपनी शिकायत दर्ज कराकर सीधे उच्चाधिकारियों के माध्यम से समाधान पा रहे हैं। इस व्यवस्था से राज्य सरकार की लोक सेवाओं को पूरी संवेदनशीलता के साथ अंतिम छोर तक पहुँचाने के संकल्प को गति मिली है। इस प्रभावी निरीक्षण से जनसुनवाई प्रणाली अधिक परिणामोन्मुखी हुई है, जिसके लिए आमजन ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है।
इस निरीक्षण के दौरान वित्त विभाग और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।