रिपोर्ट योगेश शर्मा
जयपुर। मलमास की समाप्ति और मांगलिक कार्यों की शुरुआत के साथ ही गुलाबी नगरी के प्रथम पूज्य मोतीडूंगरी गणेशजी महाराज के दरबार में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। मलमास के बाद पड़ने वाले पहले बुधवार को भक्तों ने अपने घरों में होने वाले मांगलिक कार्यों, विशेषकर विवाह समारोहों का पहला निमंत्रण गणपति के चरणों में अर्पित किया।
गणपति के चरणों में 80 हजार निमंत्रण पत्र
मोतीडूंगरी गणेश मंदिर के महंत पंडित कैलाश शर्मा ने बताया कि बुधवार का दिन बेहद खास रहा। सुबह से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। अनुमान के मुताबिक, एक ही दिन में करीब 70 से 80 हजार विवाह के कार्ड मंदिर में चढ़ाए गए।
मंदिर की यह अनोखी परंपरा है कि श्रद्धालु न केवल कार्ड चढ़ाते हैं, बल्कि गजानन महाराज को कार्ड का कुछ अंश पढ़कर सुनाते भी हैं, ताकि भगवान को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रण स्वीकार करने की विनती की जा सके।
जेएलएन मार्ग तक लगी लंबी कतारें
आगामी अक्षय तृतीया और जानकी नवमी जैसे अबूझ सावे (बिना मुहूर्त देखे होने वाले विवाह) के लिए आशीर्वाद लेने पहुंचे श्रद्धालुओं की भीड़ इतनी अधिक थी कि मंदिर परिसर छोटा पड़ गया।
- भक्तों का हुजूम: कतार का एक छोर मंदिर के गर्भगृह में था, तो दूसरा सिरा मुख्य जेएलएन मार्ग तक जा पहुँचा।
- सुरक्षा व्यवस्था: भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन को खासी मशक्कत करनी पड़ी। सुचारू दर्शन के लिए बैरिकेडिंग और अतिरिक्त जाब्ता तैनात किया गया।
आस्था का अटूट विश्वास: ‘विघ्न न आए कोई’
पूजा की थाली, श्रीफल (नारियल), मोदक और लाल कुमकुम के साथ श्रद्धालु अपने परिवार सहित पहुंचे। जयपुर निवासी नीलम शर्मा ने बताया कि वे अपने पुत्र आदित्य के विवाह का पहला कार्ड लेकर पहुंची हैं। उन्होंने कहा, “हमारे यहाँ मान्यता है कि यदि पहला न्यौता गजानन को दिया जाए, तो पूरे विवाह उत्सव में कोई बाधा नहीं आती और सभी कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं।”
धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में मलमास के दौरान मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। बुधवार गणेशजी का प्रिय दिन माना जाता है, इसलिए मलमास खत्म होने के बाद के पहले बुधवार को जयपुरवासी अपने हर शुभ कार्य की शुरुआत ‘सिद्धि विनायक’ के दर्शनों के साथ करना श्रेष्ठ मानते हैं।
प्रमुख बिंदु: एक नजर में
- कुल कार्ड: ~80,000 (एक दिन में)
- प्रमुख सावे: अक्षय तृतीया, जानकी नवमी।
- मान्यता: विवाह का प्रथम निमंत्रण भगवान गणेश को देना।
- भीड़ का असर: जेएलएन मार्ग और रामनिवास बाग के आसपास यातायात का भारी दबाव।
गणपति के जयकारों से गुंजायमान मोतीडूंगरी मंदिर में आस्था का यह नजारा देर रात तक जारी रहा, जहाँ हर भक्त की एक ही कामना थी— “हे गजानन, हमारे घर पधारना और खुशियां बढ़ाना।”