विकास की राह में बाधक नहीं बना पर्यावरण: औद्योगिक क्षेत्र से शिफ्ट कर रातल्या के मोक्षधाम में पीपल के पेड़ को दिया नया जीवनदान

जयपुर/सांगानेर। योगेश शर्मा 

औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का एक बेहद अनूठा और अनुकरणीय उदाहरण राजधानी के निकटवर्ती क्षेत्र में देखने को मिला है। डिग्गी-मालपुरा रोड स्थित ग्राम रातल्या में बुधवार को विकास कार्यों की वेदी पर चढ़ने जा रहे एक विशालकाय पीपल के पेड़ को न सिर्फ कटने से बचाया गया, बल्कि उसे पूरी वैज्ञानिक तकनीक के साथ नया जीवनदान भी दिया गया। औद्योगिक क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों के कारण यह १५ फीट लंबा पीपल का पेड़ कटने की कगार पर पहुंच चुका था, जिसे पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों की सजगता से सुरक्षित रूप से अन्यत्र शिफ्ट कर दिया गया है।

​क्रेन और विशेष तकनीक से जड़ों समेत सुरक्षित उखाड़ा गया

​पर्यावरण प्रेमी नाथूराम कंडेरा ने इस अनूठी मुहिम की जानकारी देते हुए बताया कि औद्योगिक क्षेत्र के विकास कार्यों के दौरान इस हरे-भरे पीपल के पेड़ को काटा जाना तय माना जा रहा था। पेड़ के महत्व और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को समझते हुए इसे काटने के बजाय ट्रांसप्लांट (प्रत्यारोपित) करने का निर्णय लिया गया।

​बुधवार को विशेषज्ञों की विशेष निगरानी में आधुनिक मशीनों और क्रेन की सहायता से पेड़ के चारों ओर गहरी खुदाई की गई। इस दौरान पेड़ की मुख्य जड़ों (Root Ball) को बिना कोई नुकसान पहुंचाए बेहद सुरक्षित तरीके से मिट्टी समेत बाहर निकाला गया।

​वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बाद मोक्षधाम में प्रत्यारोपण

​पेड़ को उखाड़ने के बाद उसे विशेष वाहन के जरिए रातल्या गांव के मोक्षधाम (शमशान घाट) परिसर में लाया गया। यहां पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों ने सनातन परंपरा के अनुसार वृक्ष की विधिवत पूजा-अर्चना की और उसके दीर्घायु व पुनर्जीवित रहने की कामना के साथ मोक्षधाम परिसर में तैयार किए गए बड़े गड्ढे में प्रत्यारोपित कर दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, जड़ों को सुरक्षित रखे जाने के कारण इस पीपल के पेड़ के नए स्थान पर तेजी से पनपने और जीवित रहने की शत-प्रतिशत संभावना है।

​नियमित सिंचाई और देखभाल का लिया जिम्मा, ग्रामीणों ने सराहा

​ग्रामीणों ने केवल पेड़ लगाने तक ही अपनी जिम्मेदारी सीमित नहीं रखी है, बल्कि मोक्षधाम परिसर में स्थापित इस पीपल के पेड़ की नियमित सिंचाई, खाद और सुरक्षा (ट्री-गार्ड) की भी पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। स्थानीय जागरूक नागरिकों के अनुसार, इस सफल प्रत्यारोपण से न केवल क्षेत्र के हरित आवरण (ग्रीन कवर) को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी इस पूजनीय वृक्ष की घनी छांव और भरपूर ऑक्सीजन का लाभ मिल सकेगा।

​इस गरिमामयी और प्रेरक पहल के अवसर पर क्षेत्र के प्रमुख नागरिक और पर्यावरण प्रेमी दिनेश बागड़ा, जगदीश मेहता, बाबूलाल शर्मा, राजूलाल अचरावाला, कमल शर्मा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा मौजूद रहे, जिन्होंने इस कार्य को हरित संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।

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