विकसित भारत @2047 के संकल्प को सिद्ध करेगा सहकारी क्षेत्र: सहकारिता मंत्री
जयपुर/नई दिल्ली | 24 मार्च 2026
| नरेश गुनानी
सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार दक ने मंगलवार को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित एक भव्य समारोह में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) के ‘क्षेत्रीय उत्कृष्टता एवं श्रेष्ठता पुरस्कार-2025’ प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने सहकारी समितियों का आह्वान किया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के लक्ष्य में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

प्रमुख बिंदु: सहकारिता से समृद्धि की ओर
- युवा ऊर्जा का समावेश: सहकारिता मंत्री ने जोर देकर कहा कि सहकारी समितियों में पुराने ढर्रे को छोड़कर नए और ऊर्जावान लोगों को काम करने का समुचित अवसर मिलना चाहिए। इससे क्षेत्र में नवीनता और आधुनिकता आएगी।
- आत्मनिर्भरता का आधार: उन्होंने कहा कि 2021 में पृथक सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद देश में सहकारी आंदोलन ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘स्वदेशी’ के संकल्प को पूरा करने का मुख्य माध्यम बन गया है।
- 9 लाख नए सदस्य: राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में चलाए गए विशेष सदस्यता अभियान के तहत लगभग 9 लाख नए लोगों को सहकारिता से जोड़ा गया है।
पुरस्कारों का वितरण और पारदर्शिता
कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली समितियों को सम्मानित करते हुए गौतम कुमार दक ने पारदर्शिता पर विशेष बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
- सहकारी समितियों की ऑडिट और आमसभा (General Body Meeting) समय पर होनी चाहिए।
- समितियों को अब केवल पारंपरिक कार्यों तक सीमित न रहकर क्षेत्रीय उत्पादों के विपणन (Marketing) और निर्यात पर ध्यान देना चाहिए।
- वर्तमान में लागू 120 से अधिक नई पहलों को अपनाकर समितियां खुद को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएं।
पुरस्कारों की श्रेणी एवं प्रोत्साहन
एनसीडीसी के क्षेत्रीय निदेशक सुनील कुमार छापोला ने जानकारी दी कि ये पुरस्कार प्रति दो वर्ष में राज्य स्तर पर दिए जाते हैं:
- उत्कृष्टता पुरस्कार: ट्रॉफी, प्रमाण पत्र और ₹35,000 की राशि।
- श्रेष्ठता पुरस्कार: ट्रॉफी, प्रमाण पत्र और 25,000 की राशि।
किसानों के जीवन में बदलाव
किशनगढ़ क्रय-विक्रय सहकारी समिति के अध्यक्ष चेतन चौधरी ने कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए कहा कि केंद्र में अमित शाह और राज्य में गौतम कुमार दक के प्रयासों से समितियों में जवाबदेही तय हुई है। कृषि जिंसों के समर्थन मूल्य में वृद्धि होने से सीधे तौर पर किसानों का जीवन स्तर सुधरा है।
