विकसित भारत 2047 की परिकल्पना: सुरेश ज्ञान विहार विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय शिक्षा शिखर सम्मेलन का शुभारंभ

जयपुर।/योगेश शर्मा/सुरेश ज्ञान विहार विश्वविद्यालय (एसजीवीयू), जयपुर में तीन दिवसीय ‘शिक्षा शिखर सम्मेलन 2026’ का आगाज़ बेहद उत्साहपूर्ण और भव्य माहौल में हुआ। इस वर्ष यह सम्मेलन ‘विकसित भारत 2047 के लिए शिक्षा का पुनर्कल्पन’ विषय पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में उच्च शिक्षा के भविष्य को एक नई दिशा देने के लिए एक सार्थक और दूरगामी रोडमैप तैयार करना है।

​सम्मेलन के पहले ही दिन देशभर से आए कुलपतियों, अधिष्ठाताओं (डीन), निदेशकों, विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्यों, प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, नवउद्यम संवर्धन केंद्रों के संचालकों और उद्योग जगत के अग्रणी प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

​राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े ने किया उद्घाटन

​उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े रहे। अपने संबोधन में उन्होंने वर्ष 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को पाने के लिए हमारी शिक्षा व्यवस्था में तीन चीजों का होना बेहद जरूरी है:

  • नवाचार (Innovation): नए विचारों और तकनीकों को बढ़ावा देना।
  • कौशल-आधारित शिक्षण (Skill-based Learning): केवल किताबी ज्ञान के बजाय विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने वाले हुनर सिखाना।
  • मूल्यपरक शिक्षा (Value-based Education): नैतिक मूल्यों और संस्कारों से युक्त शिक्षा देना।

​राज्यपाल ने शिक्षा क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) को एक मंच पर लाने और इस तरह के सार्थक संवाद की शुरुआत करने के लिए सुरेश ज्ञान विहार विश्वविद्यालय के प्रयासों की जमकर सराहना की।

​विश्वविद्यालय नेतृत्व ने साझा की दूरदर्शी योजनाएं

​कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के शीर्ष नेतृत्व ने राष्ट्र निर्माण और शैक्षणिक उत्कृष्टता को लेकर अपने विचार साझा किए:

  • सुनील शर्मा (अध्यक्ष, एसजीवीयू): कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता, उच्च स्तरीय अनुसंधान (रिसर्च) और देश के विकास के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को सामने रखा।
  • डॉ. सुधांशु (मुख्य मार्गदर्शक): उन्होंने युवा भारत की उम्मीदों और आकांक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि आज के समय में देश को ऐसी परिवर्तनकारी शैक्षिक नीतियों की जरूरत है जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
  • डॉ. रितु गिलहोत्रा (कुलपति): उन्होंने विश्वविद्यालय की भविष्य की योजनाओं का खाका पेश किया, जिसमें मुख्य रूप से नवाचार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहभागिता (ग्लोबल पार्टनरशिप) और विद्यार्थियों का समग्र विकास शामिल है।
  • कनिष्क शर्मा (निदेशक): कार्यक्रम के अंत में उन्होंने राज्यपाल सहित देश-विदेश से आए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

​’कुलपति सम्मेलन’ में एनईपी-2020 और एआई पर मंथन

​इस भव्य आयोजन के अंतर्गत एक विशेष ‘कुलपति सम्मेलन’ भी आयोजित किया गया, जिसमें देश के जाने-माने शिक्षा जगत के लीडर्स ने उच्च शिक्षा के ढांचे को बदलने के लिए रणनीतिक कार्ययोजनाओं पर बात की।

​इस दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर गहन चर्चा हुई:

  1. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP-2020): इसे जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करना।
  2. बहुविषयक शिक्षा (Multidisciplinary Education): छात्रों को एक साथ अलग-अलग क्षेत्रों के विषय चुनने की आजादी देना।
  3. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और पाठ्यक्रम: बदलते दौर के साथ सिलेबस में एआई और आधुनिक तकनीकों को जोड़ना।
  4. सुशासन और अनुसंधान: शिक्षा संस्थानों में बेहतर गवर्नेंस, गुणवत्ता का भरोसा, फैकल्टी डेवलपमेंट और एक मजबूत रिसर्च इकोसिस्टम तैयार करना।

​वक्ताओं ने इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो न सिर्फ रोजगार के अवसर पैदा करे बल्कि युवाओं में उद्यमिता (Entrepreneurship) की भावना भी जगाए।

​पहले दिन का रिपोर्ट कार्ड -आंकड़ों में

​सम्मेलन के पहले दिन की सफलता को इन आंकड़ों के जरिए समझा जा सकता है:

सहभागिता का प्रकार

कुल संख्या

विशिष्ट वक्ता (Keynote Speakers)

100 से अधिक

प्रतिनिधि (Delegates – ऑन-ग्राउंड)

500 से अधिक

ऑनलाइन दर्शक (Virtual Viewers)

5,000 से अधिक

सम्मेलन का पहला दिन बेहद कामयाब रहा। आने वाले दो दिनों में भी अलग-अलग थीम पर आधारित सत्रों, पैनल चर्चाओं और विशेषज्ञों के विचार-विमर्श के जरिए विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को साकार करने वाली भविष्य-उन्मुख शिक्षा व्यवस्था पर मंथन जारी रहेगा।

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