वाटरशेड महोत्सव का राज्य स्तरीय शुभारंभ समारोह— जल स्रोतों के पुनरुद्धार से भूजल स्तर बढ़ेगा, भूमि में नमी से हरियाली बढ़ेगी
रिपोर्ट नरेश गुनानी, टेलीग्राफ टाइम्स
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13 नवम्बर 2025, 06:08 PM
जयपुर, 13 नवम्बर। शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि प्रदेश में कई स्थानों पर भूजल स्तर काफी नीचे पहुंच गया है। भूमि में नमी की कमी से वनस्पतियां उत्पादित नहीं हो पा रही हैं और निरंतर मिट्टी के कटाव से भूमि की उर्वरा शक्ति घट रही है। ऐसी परिस्थितियों में वर्षा के पानी को एकत्र कर भूजल रिचार्ज बढ़ाने और नदियों, तालाबों व पारंपरिक जल स्रोतों के पुनरुद्धार के कार्य मिशन वाटरशेड के तहत करना आवश्यक है। इन्हीं उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए कोटा जिले की खैराबाद पंचायत समिति के उण्डवा गांव में वाटरशेड महोत्सव एवं मिशन जल ग्रहण पुनरुत्थान कार्यक्रम का राज्य स्तरीय शुभारंभ किया गया।
मंत्री दिलावर ने कहा कि प्रदेश की सभी 159 जल ग्रहण विकास परियोजनाओं में ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से आमजन में जागरूकता बढ़ाई जाएगी। जल स्रोतों के पुनरुद्धार से भूजल स्तर में वृद्धि, भूमि में नमी और हरियाली बढ़ेगी जिससे पशुओं के लिए चारा भी उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि “विलायती बबूल हटाओ–चारागाह बचाओ” अभियान के तहत जूलीफ्लोरा नामक विलायती बबूल को समूल नष्ट किया जाएगा। यह पौधा 500 से अधिक देशी वनस्पतियों को समाप्त कर चुका है और प्रतिदिन लगभग 30 लीटर पानी सोखता है, जिससे भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। इस पौधे से निकलने वाली विषैली गैसें बीमारियों का कारण बनती हैं और मिट्टी को अनुपजाऊ करती हैं। उन्होंने पंचायतों से आग्रह किया कि अपने कोष से यह पौधा जड़ से उखाड़कर नष्ट करें और वहां चरागाहों का विकास करें।
दिलावर ने बताया कि जल स्रोतों के पुनरुद्धार अभियान के अंतर्गत रामगंजमंडी क्षेत्र की वर्षों पुरानी पाटली नदी को पुनर्जीवित किया गया है, जिससे अब 50 हजार बीघा से अधिक भूमि सिंचित होगी। उन्होंने बताया कि राजस्थान देश का पहला राज्य है जहां देशी वनस्पतियों के संरक्षण हेतु बीज बैंक स्थापित किए गए हैं। इस अवसर पर उन्होंने मोबाइल बीज बैंक मॉड्यूल का भी शुभारंभ किया, जिसके माध्यम से वानस्पतिक बीज बैंकों की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने हर ग्राम पंचायत को स्वच्छता बनाए रखने हेतु प्रति माह एक लाख रुपये और अधिक जनसंख्या वाली पंचायतों को पांच लाख रुपये तक की राशि उपलब्ध कराई है। उन्होंने आह्वान किया कि हर गांव में प्रतिदिन झाड़ू लगे, घर-घर से कचरा एकत्र किया जाए और ईमानदार कर्मचारियों को प्रोत्साहन मिले, जबकि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जल ग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण निदेशक मोहम्मद जुनैद ने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-2.0 के तहत देशभर में अकृषि भूमि को कृषि भूमि में बदलने और गिरते भूजल स्तर में सुधार के लिए 2000 करोड़ रुपये के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें खैराबाद पंचायत समिति की 11 करोड़ रुपये की परियोजना भी शामिल है। प्रदेश के 159 परियोजनाओं में कार्य जारी हैं।
इस अवसर पर भारत सरकार द्वारा जल ग्रहण विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 15 परियोजनाओं को 20-20 लाख रुपये की पुरस्कार राशि के चेक वितरित किए गए। इनमें उदयपुर, राजसमंद, फलौदी, बीकानेर, भरतपुर, अलवर, झालावाड़ और झुंझुनूं जिलों की पंचायत समितियों को सम्मानित किया गया।
मदन दिलावर ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-2.0 के अंतर्गत 17.50 लाख रुपये से लक्ष्मीपुरा में नाले पर एनीकट निर्माण, देवलीखुर्द में 18.30 लाख, उण्डवा में 19.76 लाख, पुलिया के पास 10.87 लाख और ग्राम बंधा में 21.12 लाख रुपये की लागत से एनीकट एवं चेक डेम निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया। उन्होंने पौधारोपण किया, प्रदर्शनी देखी और जल ग्रहण विकास की सफलता की कहानियों पर आधारित पुस्तिका का विमोचन भी किया।
अतिरिक्त निदेशक आनंद सिंह ने बताया कि 4 नवम्बर से 16 दिसम्बर तक मिशन वाटरशेड पुनरुत्थान के तहत प्रदेशभर में जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। सोशल मीडिया पर जल ग्रहण विकास से जुड़ी उत्कृष्ट रील बनाने वाले चार विजेताओं को 50-50 हजार रुपये तथा 100 चयनित फोटोग्राफ को एक-एक हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।
कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम से हुई और समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। दिल्ली में हुई आतंकी घटना में मारे गए लोगों के प्रति दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।
राज्य स्तरीय शुभारंभ से पूर्व मदन दिलावर ने उण्डवा से साढ़े तीन किलोमीटर तक पदयात्रा करते हुए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-2.0 के अंतर्गत मिनी परकोलेशन टैंक निर्माण कार्य का श्रमदान कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।