जयपुर/प्रीति बालानी/राजस्थान की समृद्ध ब्लॉक प्रिंटिंग, हस्तशिल्प और वस्त्र प्रसंस्करण की विश्व स्तरीय परंपरा को सर्कुलर इकोनॉमी एवं पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के साथ जोड़ना होगा, ताकि यह भविष्य की प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन सके। यह विचार राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB) की अध्यक्षा अपर्णा अरोड़ा ने बुधवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में व्यक्त किए। वह ‘सर्कुलैरिटी इन द टैक्सटाइल सेक्टर—बेस्ट प्रेक्टिसेज फॉर सस्टेनेबिलिटी एण्ड मॉडर्न टेक्नोलॉजिज फार सर्कुलर इकोनोमी’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं।
यह कार्यशाला सितंबर में आयोजित होने वाले 10वें ‘वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम’ के प्री-इवेंट के रूप में आयोजित की गई।
जीरो लिक्विड डिस्चार्ज और जल पुनर्चक्रण पर जोर
अध्यक्ष अपर्णा अरोड़ा ने कहा कि सांगानेर, बगरू, बालोतरा, पाली और बाड़मेर की ब्लॉक प्रिंटिंग की वैश्विक पहचान है। इस विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के दायित्व को निभाना जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि वस्त्र इकाइयों को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD), जल परिशोधन, परिशोधित जल के पुनः उपयोग और स्लज के वैज्ञानिक निस्तारण की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
उन्होंने सुझाव दिया कि राजस्थान रिफाइनरी के पास विकसित हो रहे पेट्रो जोन के उद्योगों की पानी की मांग को बालोतरा के ट्रीटेड (परिशोधित) पानी से पूरा किया जा सकता है। साथ ही ट्रीटमेंट प्लांटों की स्लज का उपयोग सीमेंट उद्योग और ब्लॉक निर्माण में करने की संभावनाएं तलाशी जानी चाहिए।
उद्योग और नियामक का समन्वय जरूरी
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव कपिल चंद्रवाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। मंडल का उद्देश्य केवल नियमन करना नहीं, बल्कि उद्योगों को ZLD प्रणाली, जल पुनर्चक्रण और प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन अपनाने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करना भी है। उन्होंने उद्योगों से पर्यावरणीय मानकों का स्वैच्छिक अनुपालन करने का आह्वान किया।
BARC ने पेश किया किफायती ZLD मॉडल
तकनीकी सत्र में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), मुंबई के डॉ. वीरेंद्र कुमार ने प्रस्तुति देते हुए बताया कि भविष्य का औद्योगिक विकास ‘4R’ सिद्धांत—Reduce, Reprocess, Reuse और Resource Recovery पर आधारित होगा। उन्होंने रेडिएशन आधारित एडसॉर्बेंट तकनीक के जरिए रंगयुक्त अपशिष्ट जल के किफायती उपचार के मॉडल को रेखांकित किया।
कार्यशाला में विशेषज्ञ डॉ. चिराग भीमानी (वर्चुअल), भीलवाड़ा इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रो. वीरेंद्र कुमार गुप्ता, प्रियेश भट्टी, गिरीश थोरात और रुचित अग्रवाल ने जल संरक्षण, सतत रसायन उपयोग और अपशिष्ट प्रबंधन पर अपने तकनीकी विचार रखे।
सत्र के समापन पर मंडल के अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता भुवनेश माथुर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यशाला में पर्यावरण सचिव शैलजा देवल सहित सांगानेर, बालोतरा, पाली और जोधपुर टेक्सटाइल क्लस्टर्स के उद्यमियों, तकनीकी विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों ने भाग लिया।