वर्ष 2027 तक बिजली क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा राजस्थान: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय बैठक में दिए निर्देश; बिजली खरीद 8% से घटकर मात्र 2% पर आई

नरेश गुनानी 

जयपुर, 04 जून। राजस्थान को बिजली के क्षेत्र में अग्रणी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार ने प्रयासों को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि प्रदेश को वर्ष 2027 तक बिजली के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना सरकार का मुख्य लक्ष्य है। इसके लिए ऊर्जा विभाग विद्युत उत्पादन और प्रसारण के क्षेत्र में कुशल प्रबंधन के साथ काम करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि थर्मल, हाइड्रो, सोलर और विंड जैसे सभी माध्यमों का प्रभावी उपयोग कर किसानों, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

​मुख्यमंत्री बुधवार को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित ऊर्जा विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हीरालाल नागर सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

​बिजली बेचने वाला अग्रणी राज्य बनेगा राजस्थान

​बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की पहचान बिजली खरीदने वाले राज्य की नहीं, बल्कि बिजली बेचने वाले एक अग्रणी प्रदेश के रूप में मजबूत होनी चाहिए। इसके लिए विभागीय अधिकारी पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्ययोजना के अनुरूप लक्ष्यों को समय पर पूरा करें। उन्होंने विद्युत तंत्र के सुदृढ़ीकरण से जुड़े कार्यों को गति प्रदान करने के निर्देश दिए।

​किसानों को दिन में बिजली और सौर ऊर्जा पर जोर

​मुख्यमंत्री ने बैठक में कृषि और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए:

  • दिन में बिजली आपूर्ति: प्रदेश के 26 जिलों में किसानों को दिन के समय बिजली मिल रही है। मुख्यमंत्री ने इस सुविधा को शेष बचे जिलों में भी जल्द से जल्द लागू करने के प्रयासों में तेजी लाने को कहा है।
  • सौर ऊर्जा योजनाओं का विस्तार: अधिक से अधिक उपभोक्ताओं और हितधारकों को ‘पीएम कुसुम योजना’ और ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ से लाभांवित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि सौर ऊर्जा के उत्पादन को जमीनी स्तर पर बढ़ावा मिल सके।
  • शिकायत निवारण तंत्र: उपभोक्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal System) को तकनीकी स्तर पर और अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने पर जोर दिया गया।
  • डिस्कॉम में समन्वय: सभी डिस्कॉम को बिजली की उपलब्धता बनाए रखने के लिए आपसी समन्वय से काम करने को कहा गया है। इसके साथ ही जोधपुर डिस्कॉम में आरडीएसएस (RDSS) के शेष कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए।

​ठोस प्रयासों से बिजली खरीद में भारी कमी

​बैठक में विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों से सामने आया कि राज्य सरकार के प्रभावी प्रबंधन के कारण बाहरी स्रोतों से बिजली खरीद पर निर्भरता काफी कम हुई है:

  • बिजली खरीद में गिरावट: गत वर्ष मई माह में राज्य की कुल आवश्यकता की 8 प्रतिशत बिजली बाहर से खरीदनी पड़ी थी, जो इस वर्ष ठोस प्रयासों के चलते घटकर महज 2 प्रतिशत रह गई है।
  • रिकॉर्ड विद्युत उत्पादन: उत्पादन निगम की कोयला आधारित विद्युत इकाइयों ने 2 जून को अपनी क्षमता का बेहतरीन उपयोग करते हुए 7 हजार 171 मेगावाट विद्युत का रिकॉर्ड उत्पादन किया। मुख्यमंत्री ने उत्पादन इकाइयों की क्षमता में और वृद्धि करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

​ढाई साल में मजबूत हुआ बुनियादी ढांचा

​राज्य में विद्युत प्रसारण और वितरण नेटवर्क को मजबूत करने के लिए बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार किया गया है:

  • जीएसएस (GSS) की स्थापना: राज्य सरकार के ढाई वर्ष के कार्यकाल में 400 केवी, 220 केवी और 132 केवी के 60 जीएसएस स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 151 जीएसएस का कार्य वर्तमान में प्रगति पर है।
  • सब स्टेशन का नेटवर्क: इसी समयावधि में 33 केवी के 444 सब स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं तथा 211 नए सब स्टेशन बनाने का कार्य तेजी से चल रहा है।

​बैठक में ये रहे उपस्थित

​इस उच्चस्तरीय बैठक में ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हीरालाल नागर, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) अखिल अरोड़ा, ऊर्जा विभाग की शासन सचिव आरती डोगरा सहित ऊर्जा विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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