दिव्या तिवाड़ी
कोटा , 3 जून 2026। चम्बल रिवर फ्रंट पर गत 25 मई को शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर द्वारा मां चम्बल की आरती, दीपदान और भव्य कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ अब कोटा जिले में एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। अभियान के तहत ब्लॉक, ग्राम पंचायत और शहरी वार्ड स्तर तक आमजन को जोड़कर जल संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। शहरों और गांवों में सामूहिक जल शपथ, संकल्प, तालाबों-बावड़ियों की सफाई और श्रमदान के जरिए जनता की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
बुधवार को कोटा जिला परिषद सभागार में आयोजित एक मीडिया राउंड टेबल के दौरान जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं वंदे गंगा अभियान के जिला नोडल अधिकारी कमल कुमार मीणा ने अभियान की प्रगति और विभिन्न विभागों द्वारा की जा रही गतिविधियों की विस्तृत जानकारी साझा की।
विभागवार प्रमुख गतिविधियां और उपलब्धियां
अभियान के तहत विभिन्न सरकारी विभागों ने आपसी समन्वय और कार्ययोजना के साथ जल संरक्षण, स्वच्छता और श्रमदान के कार्य किए हैं:
- ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग:
- 25 मई को सभी ग्राम पंचायतों में कलश यात्रा, सरोवर पूजन एवं पीपल पूजन के साथ अभियान का आगाज किया गया।
- 26 मई को विशेष ग्राम सभाएं आयोजित कर जल संरक्षण के संकल्प दिलाए गए।
- ’हरियालो राजस्थान’ की पूर्व तैयारी के तहत पौधारोपण के लिए गड्ढे खोदने, अमृत सरोवरों और बावड़ियों की सफाई के कार्य किए गए।
- कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान: इसके तहत हैंडपम्पों के पास सोख्ता गड्ढे (Soak Pits) बनाकर भू-जल रिचार्ज के विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
- स्वायत्त शासन विभाग:
- उजाड़ नदी और सुकनी नदी सहित अन्य सरोवरों पर सफाई, पूजन और दीप प्रज्वलन कर स्वच्छता का संदेश दिया गया।
- विभिन्न नगर पालिकाओं द्वारा प्रभात फेरी, कलश यात्रा और सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने के लिए कपड़े के थैलों का वितरण किया गया।
- जल संसाधन विभाग:
- अरु नदी एनीकट पर जल पूजन, तकली बांध और पोलाई कलां तालाब पर जल उपयोक्ता संगमों के सहयोग से व्यापक सफाई अभियान चलाया गया।
- नौनेरा बैराज पर जल पूजन, वृक्षारोपण और जल संकल्प जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं।
- पशुपालन विभाग:
- गायत्री परिवार गौशाला बंधा एवं सुल्तानपुर गौशाला में विशेष सफाई अभियान चलाया गया।
- विभिन्न पशु चिकित्सा संस्थानों में पक्षियों के लिए परिंडे बांधे गए।
- प्लास्टिक से मवेशियों को होने वाले नुकसान के प्रति आमजन को जागरूक किया गया।
अभियान का मुख्य उद्देश्य
इस अभियान का मूल उद्देश्य पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरुद्धार करना, वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को बढ़ावा देना और आम नागरिक को जल के प्रति संवेदनशील बनाना है, ताकि भविष्य में जल संकट से निपटा जा सके। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस अभियान के तहत जन-जागरूकता के और भी रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।