पुष्कर/अजमेर। हरि प्रसाद शर्मा
राज्य सरकार द्वारा जल स्रोतों के पुनरुद्धार और पर्यावरण संरक्षण के लिए चलाए जा रहे ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ के तहत ग्राम खोरी स्थित ऐतिहासिक वैद्यनाथ महादेव मंदिर परिसर में एक विशाल श्रमदान एवं स्वच्छता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अभियान के दौरान मंदिर परिसर और उसके आसपास के पारंपरिक जल स्रोत क्षेत्रों से गाद, कचरा और प्लास्टिक अपशिष्ट हटाकर उन्हें नया जीवन देने का संकल्प लिया गया। इस पुनीत कार्य में प्रशासनिक अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने कंधे से कंधा मिलाकर उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रशासनिक अमले और जनप्रतिनिधियों ने खुद उठाया फावड़ा
कार्यक्रम में क्षेत्रीय विकास और पर्यावरण चेतना को गति देने के लिए उपखंड अधिकारी (SDO) गुरु प्रसाद तंवर, तहसीलदार इन्द्रजीत सिंह चौहान, विकास अधिकारी (BDO) सुधीर पाठक, पूर्व सरपंच घनश्याम सिंह कड़ेल, कानस सरपंच महेन्द्र सिंह रावत और समाजसेवी अरविन्द पारीक सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने खुद अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर श्रमदान किया, जिससे प्रेरित होकर देखते ही देखते पूरा परिसर जनभागीदारी के अनूठे केंद्र में बदल गया।
जल संरक्षण की दिलाई सामूहिक शपथ
श्रमदान के पश्चात मंदिर परिसर में उपस्थित जनसमूह को जल और प्रकृति के अंतर्संबंधों के प्रति जागरूक किया गया। इस अवसर पर सभी ग्रामीणों को:
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- वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting): बारिश की हर बूंद को सहेजने।
- पारंपरिक स्रोतों का संरक्षण: कुओं, बावड़ियों और तालाबों की नियमित सफाई रखने।
- पर्यावरण संतुलन: अधिक से अधिक पौधे लगाने और सिंगल-यूज प्लास्टिक का बहिष्कार करने की सामूहिक शपथ दिलाई गई।
”जल संरक्षण केवल किसी एक विभाग या सरकारी तंत्र का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह जन-जन की भागीदारी से जुड़ा एक जीवंत अभियान है। हमारे पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण और संवर्धन आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए बेहद अनिवार्य है। इसमें हर नागरिक को अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।”
— गुरु प्रसाद तंवर, उपखंड अधिकारी
ग्रामीण महिलाओं और युवाओं में दिखा भारी उत्साह
इस अभियान की सबसे खास बात स्थानीय ग्रामीण महिलाओं और युवाओं की अभूतपूर्व भागीदारी रही। तपती धूप के बावजूद ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर जल स्रोतों की सफाई की और सामूहिक गीतों व नारों के जरिए पूरे गांव में पर्यावरण चेतना का संचार किया। इस सफल कार्यक्रम ने न केवल वैद्यनाथ महादेव मंदिर क्षेत्र को स्वच्छ और सुंदर बनाया, बल्कि सामुदायिक सहभागिता की एक अनुपम मिसाल भी पेश की।