प्रतापगढ़, 2 जून। नरेश गुनानी
प्रदेशभर में चल रहे ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ के तहत प्रतापगढ़ जिले की ग्राम पंचायत बजरंगगढ़ में जल संसाधन विभाग द्वारा एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के राजस्व मंत्री हेमंत मीणा ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने स्वयं श्रमदान कर ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति जनभागीदारी का संदेश दिया और पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों और भारी संख्या में उपस्थित ग्रामजन को उन्होंने जल संरक्षण और संवर्धन की शपथ भी दिलाई।
जल संरक्षण के बिना सतत विकास असंभव: राजस्व मंत्री
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री हेमंत मीणा ने कहा कि जल ही जीवन का मुख्य आधार है और इसके संरक्षण के बिना किसी भी प्रकार के सतत विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज देशभर में जल संरक्षण, पर्यावरण सुधार और जनभागीदारी पर आधारित अभियानों को एक नई दिशा मिली है। इसी कड़ी में, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार राज्य के जल संसाधनों के संरक्षण, पारंपरिक जल संरचनाओं के पुनर्जीवन और वर्षा जल संचयन (रेन वॉटर हार्वेस्टिंग) को बढ़ावा देने के लिए बेहद प्रभावी और धरातलीय कार्य कर रही है।
सरकारी कार्यक्रम नहीं, इसे जन आंदोलन बनाएं
राजस्व मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ मात्र एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक जन आंदोलन है। उन्होंने कहा:
”इस अभियान की सफलता तभी सुनिश्चित हो सकती है जब समाज के प्रत्येक व्यक्ति की इसमें सक्रिय सहभागिता हो। पानी बचाने, अपने आस-पास के जल स्रोतों की नियमित साफ-सफाई करने, अधिक से अधिक पौधारोपण करने और वर्षा जल को सहेजने जैसे सामूहिक प्रयासों से ही हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।”
जल की हर बूंद को सहेजने का संकल्प और जल पूजन
हेमंत मीणा ने दोहराया कि राज्य सरकार जल संरक्षण को हर नागरिक का निजी संकल्प बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यही कारण है कि आज पूरे प्रदेश में विभिन्न सरकारी विभागों और स्थानीय समुदायों के समन्वय से बड़े पैमाने पर जागरूकता गतिविधियां चलाई जा रही हैं। उन्होंने कार्यक्रम में आए सभी लोगों से अपील की कि वे पानी की एक-एक बूंद की कीमत को समझें और इसे व्यर्थ बहने से रोकने का दृढ़ संकल्प लें।
इस अवसर पर परंपराओं का निर्वहन करते हुए मंत्री हेमंत मीणा ने जल स्रोतों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए ‘जल पूजन’ भी किया।
कार्यक्रम के दौरान जल संसाधन विभाग के अधिकारियों द्वारा उपस्थित ग्रामीणों को जल संचयन की विभिन्न तकनीकों और अभियान के मुख्य उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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