गौरव कोचर
पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में धोखाधड़ी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने व्यापारिक गलियारों और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। बैंक लोन दिलाने के बहाने एक जालसाज ने व्यापारी के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर न केवल 7 करोड़ रुपये का फर्जी ट्रांजैक्शन किया, बल्कि उसके नाम पर 13 बोगस फर्में भी खड़ी कर दीं।
मुख्य बिंदु:
- आरोपी: अजमल उर्फ समीर राणा।
- ठगी का तरीका: बैंक लोन दिलाने के नाम पर GST क्रेडेंशियल्स की चोरी।
- कुल फ्रॉड: 7 करोड़ रुपये की बोगस बिलिंग।
- कार्रवाई: थाना कोतवाली में मामला दर्ज, पुलिस की छापेमारी जारी।
विस्तृत समाचार: विश्वास का फायदा उठाकर रचा षडयंत्र
लोन का झांसा और दस्तावेजों की हेराफेरी
पीलीभीत के थाना कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले व्यापारी नईम को बैंक लोन की आवश्यकता थी। इसी दौरान उनकी मुलाकात आरोपी अजमल उर्फ समीर राणा से हुई। आरोपी ने खुद को बैंक का एजेंट बताते हुए बड़े लोन का झांसा दिया। प्रक्रिया के नाम पर उसने व्यापारी से उसका आधार कार्ड, पैन कार्ड, जीएसटी आईडी और पासवर्ड हासिल कर लिए।
13 फर्जी फर्मों का साम्राज्य
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर व्यापारी की जानकारी के बिना 13 अलग-अलग फर्में पंजीकृत करा लीं। इन फर्मों के माध्यम से कागजों पर करोड़ों रुपये का लेनदेन दिखाया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने लगभग 7 करोड़ रुपये की फर्जी खरीदारी और बिक्री दिखाकर अवैध रूप से Input Tax Credit (ITC) हड़पने की साजिश रची थी।
जीएसटी विभाग के फोन से उड़े होश
मामले की भनक पीड़ित को तब लगी जब मार्च 2026 में जीएसटी विभाग के अधिकारियों ने उसे फोन कर करोड़ों के पेंडिंग रिटर्न और टैक्स चोरी के बारे में पूछताछ की। जब व्यापारी ने अपना पोर्टल चेक किया, तो वहां एक के बाद एक खुली हुई फर्जी कंपनियों और करोड़ों के टर्नओवर को देखकर वह दंग रह गया।
पुलिस की कार्रवाई और विभाग की चेतावनी
पीड़ित की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस को अंदेशा है कि इस खेल में कोई बड़ा सिंडिकेट शामिल हो सकता है जो सीधे तौर पर सरकारी राजस्व को चूना लगा रहा है।
साइबर विशेषज्ञों और वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि व्यापारियों को कभी भी अपने GST पासवर्ड और OTP किसी तीसरे व्यक्ति या तथाकथित ‘एजेंट’ को नहीं देने चाहिए। पोर्टल पर समय-समय पर अपनी लॉगिन हिस्ट्री और ‘माई प्रोफाइल’ सेक्शन को चेक करते रहना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि आपकी आईडी से कोई अन्य फर्म तो लिंक नहीं की गई है।