विशेष संवाददाता, योगेश शर्मा
जयपुर: ऑल इंडिया कांग्रेस ओबीसी विभाग के पूर्व नेशनल कॉर्डिनेटर एवं ओबीसी एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य राजेन्द्र सेन ने प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में लगातार हो रही देरी को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर समय पर पारदर्शी चुनाव संपन्न कराना किसी भी चुनी हुई सरकार की प्राथमिक संवैधानिक जिम्मेदारी होती है, जिससे वर्तमान सरकार पूरी तरह पीछे भाग रही है।
“हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भी सरकार गंभीर नहीं”
राजेन्द्र सेन ने प्रदेश की भाजपा सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि राजस्थान उच्च न्यायालय और देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के स्पष्ट रुख के बावजूद राज्य सरकार चुनाव कराने को लेकर कतई गंभीर नजर नहीं आ रही है। उन्होंने न्यायिक घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा, “राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व में 439 याचिकाओं पर एक साथ ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन की संपूर्ण प्रक्रिया को पूरा करने के कड़े निर्देश दिए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी तय समयसीमा के भीतर ही चुनाव संपन्न कराने की अनिवार्यता पर मुहर लगाई थी।”
सेन ने आगे कहा कि इसके बावजूद भी राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग द्वारा न्यायालय से अतिरिक्त समय की मांग किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गहरी चिंता का विषय है।
समय पर चुनाव न होना सरकार की विफलता का प्रतीक
कांग्रेस नेता ने कहा कि पंचायतें और नगर निकाय हमारे लोकतंत्र की सबसे बुनियादी और महत्वपूर्ण इकाइयाँ हैं। इन स्थानीय निकायों के चुनाव समय पर नहीं कराना सीधे तौर पर राज्य सरकार की प्रशासनिक और राजनीतिक विफलता को दर्शाता है। जनप्रतिनिधियों के अभाव में स्थानीय स्तर पर आम जनता से जुड़े विकास कार्य और जनसुनवाई पूरी तरह ठप पड़ी है, जिससे जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
शीघ्र चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की मांग
राजेन्द्र सेन ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग से पुरजोर मांग की है कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना बंद की जाए और बिना किसी राजनीतिक नफे-नुकसान के आकलन के तुरंत पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनावों के विस्तृत कार्यक्रम की घोषणा की जाए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए जनता को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित करना बंद करना चाहिए।