नई दिल्ली/ नरेश गुनानी/‘जय जवान, जय किसान’ का अमर उद्घोष कर देश के अन्नदाता और वीर जवानों के सम्मान को नई ऊंचाइयां प्रदान करने वाले भारत के दूसरे प्रधानमंत्री, ‘भारत रत्न’ लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम मोदी ने शास्त्री जी के विचारों और देश के प्रति उनके अतुलनीय योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी सादगी, सौम्यता और समर्पण आज भी हर भारतवासी के लिए बेहद प्रेरणादायक है।
शास्त्री जी की सादगी और चट्टान जैसी दृढता को किया याद
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “लाल बहादुर शास्त्री जी को श्रद्धांजलि, जिनकी सादगी और देश के प्रति समर्पण आज भी बेहद प्रेरणादायक है।” इसके साथ ही एक संदेश में पीएम मोदी ने उनके ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा, “एक लाल बहादुर शास्त्री आए, जिन्होंने ‘जय जवान, जय किसान’ का मंत्र दिया और हिंदुस्तान का किसान उठ खड़ा हो गया।”
पीएम मोदी ने आगे कहा, “शास्त्री जी का नाम आते ही हम भारतवासियों के मन में असीम श्रद्धा का भाव उमड़ पड़ता है। उनका सौम्य व्यक्तित्व हर देशवासी को सदा ही गर्व से भर देता है। लाल बहादुर शास्त्री जी की यह विशेषता थी कि वह बाहर से अत्यधिक विनम्र दिखते थे, लेकिन भीतर से चट्टान की तरह दृढ़ निश्चयी थे। राष्ट्र के प्रति उनकी निस्वार्थ तपस्या का ही परिणाम था कि लगभग डेढ़ वर्ष के अपने संक्षिप्त कार्यकाल में भी वे देश के जवानों और किसानों को सफलता के शिखर पर पहुंचाने का मंत्र दे गए।”
लाल बहादुर शास्त्री का जीवन और ऐतिहासिक योगदान
- प्रारंभिक जीवन: 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में एक साधारण परिवार में जन्मे शास्त्री जी का जीवन संघर्ष और उच्च नैतिक मूल्यों की मिसाल रहा है।
- स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका: वर्ष 1921 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े और 1930 के नमक सत्याग्रह (दांडी मार्च) में सक्रिय भूमिका निभाई। देश की आजादी के आंदोलन के दौरान उन्होंने कुल नौ वर्ष ब्रिटिश जेलों में बिताए।
- वैचारिक समृद्धि: जेल में रहने के दौरान उन्होंने पश्चिमी दार्शनिकों, महान क्रांतिकारियों और समाज सुधारकों के साहित्य का गहन अध्ययन किया, जिससे उनके विचार और मजबूत हुए। वे कभी पद या सत्ता के आकांक्षी नहीं रहे, बल्कि जनसेवा को ही अपना परम धर्म मानते थे।
- देश के दूसरे प्रधानमंत्री: 27 मई 1964 को पंडित जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद, 9 जून 1964 को शास्त्री जी ने भारत के दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला।
19 महीने का ऐतिहासिक कार्यकाल और ‘जय जवान, जय किसान’
लाल बहादुर शास्त्री का प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 तक (मात्र 19 महीने) का रहा, लेकिन यह दौर बेहद चुनौतीपूर्ण था।
- 1965 का भारत-पाक युद्ध: इस दौरान पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण कर दिया। सीमाओं पर सैनिकों ने शास्त्री जी के मजबूत नेतृत्व में पाकिस्तान को करारा जवाब दिया।
- खाद्य संकट का सामना: देश उस समय गंभीर अन्न संकट से जूझ रहा था।
- कालजयी नारा: इन दोहरी चुनौतियों (सुरक्षा और भुखमरी) के बीच शास्त्री जी ने ‘जय जवान, जय किसान’ का ऐतिहासिक नारा दिया। इस नारे ने सीमाओं पर तैनात सैनिकों में जोश भरा और देश के किसानों को आत्मनिर्भरता के मार्ग पर खड़े होने के लिए प्रेरित किया।
लाल बहादुर शास्त्री का जीवन यह सिखाता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और निस्वार्थ देशभक्ति के बल पर सबसे कठिन परिस्थितियों पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है। उनका त्याग और विचार आज भी भारतीय लोकतंत्र और राष्ट्र निर्माण की नींव में रचे-बसे हैं।