‘लम्पी स्किन डिजीज’ के नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए समन्वय बैठक आयोजित — शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने रोग नियंत्रण-रोकथाम की कार्ययोजना बनाने के दिए निर्देश

‘लम्पी स्किन डिजीज’ के नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए समन्वय बैठक आयोजित — शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने रोग नियंत्रण-रोकथाम की कार्ययोजना बनाने के दिए निर्देश

04 सितम्बर 2025, नरेश गुनानी। टेलीग्राफ टाइम्स 
जयपुर, 04 सितम्बर। प्रदेश में लम्पी स्किन डिजीज (LSD) के नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए समयबद्ध तैयारियों और विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने हेतु गुरुवार को शासन सचिवालय में बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता पशुपालन विभाग के शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने की। इसमें पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. आनंद सेजरा, गोपालन निदेशक प्रह्लाद सहाय नागा सहित पशुपालन, डेयरी-गोपालन विभाग और अन्य स्टेकहोल्डर्स के अधिकारी मौजूद रहे।

डॉ. शर्मा ने कहा कि इस वर्ष लम्पी स्किन डिजीज की रोकथाम के लिए पूर्व तैयारियों को समय पर लागू किया जाना जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि पिछले वर्ष के अनुभवों के आधार पर प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए और सभी विभाग समय रहते समेकित प्रयास करें।

वर्तमान में राज्य के कुछ जिलों में इस रोग के छिटपुट मामले सामने आए हैं। ऐसे मामलों में विभाग द्वारा सर्वेक्षण, निदान और रोग नियंत्रण की कार्रवाई की जा रही है। भारत सरकार द्वारा जारी निदान योजना एवं नियंत्रण दिशा-निर्देश ट.3 के अनुरूप विभाग कार्यवाही कर रहा है। अब तक लगभग 139 लाख गौवंशीय पशुओं का गॉट पॉक्स वैक्सीन से टीकाकरण किया जा चुका है।

बैठक में डॉ. शर्मा ने विभागवार तैयारियों की समीक्षा करते हुए पशुपालन विभाग को रोग सर्वेक्षण, सैंपल कलेक्शन, उपचार और रोकथाम के लिए गाइडलाइन तैयार करने तथा पशु चिकित्सा संस्थाओं और लैब्स के माध्यम से उनकी पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, औषधियों की उपलब्धता संस्थागत स्तर तक बनाए रखने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि प्रकोप की स्थिति में एपिसेंटर, संक्रमित, उपचारित और मृत पशुओं की दैनिक सूचना निदेशालय को भेजी जाए। साथ ही, पशुपालकों का पूरा रिकॉर्ड (जनआधार कार्ड जैसी जानकारी सहित) संधारित किया जाए, ताकि आगे एपिडेमियोलॉजिकल स्टडीज में इसका उपयोग किया जा सके। मृत पशुओं के शवों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कराने के लिए विभागीय अधिकारी स्थानीय निकायों और अन्य संबंधित विभागों को तकनीकी सहयोग दें।

डॉ. शर्मा ने गोपालन विभाग को निर्देश दिए कि गौशालाओं में जैव सुरक्षा उपायों की कड़ाई से पालना की जाए। संक्रमित पशुओं को खुले में न छोड़ा जाए और नए पशुओं को कम से कम 14 दिन तक क्वारेंटाइन में रखने के बाद ही अन्य पशुओं के साथ रखा जाए।

उन्होंने राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) को निर्देश दिए कि मिल्क यूनियनों से जुड़े पशुपालकों के पशु गृहों में सेनिटाइजेशन, हाईजीन और फोगिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करें। साथ ही, जिला दुग्ध उत्पादक संघों को प्रचार-प्रसार सामग्री तैयार कर सहकारी समितियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए, ताकि दुग्ध संकलन केन्द्रों पर आने वाले पशुपालकों को रोग के प्रति जागरूक और सतर्क किया जा सके।

पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग को निर्देश दिए गए कि वेक्टर कंट्रोल के लिए कीटनाशक का छिड़काव और फोगिंग कराएं। निराश्रित गौवंशीय पशुओं के टीकाकरण में सहयोग करें और मृत पशुओं का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित करने हेतु वित्तीय प्रावधानों की समय रहते व्यवस्था करें।

इस बैठक में सभी संबंधित विभागों को लम्पी स्किन डिजीज के प्रभावी नियंत्रण के लिए मिलकर कार्य करने पर बल दिया गया।

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