लंबे इंतजार के बाद बारिश ने दी दस्तक, फसलों को मिला जीवनदान; नागौर समेत कई जिलों में झमाझम
अजमेर, 24 अगस्त। रिपोर्ट हरि प्रसाद शर्मा पुष्कर। संपादन सुनील शर्मा। टेलीग्राफ टाइम्स
राजस्थान की सूखी धरती पर आखिरकार बादलों ने मेहरबानी दिखाई। गुरुवार देर रात से शनिवार सुबह तक अजमेर, ब्यावर, नागौर, भीलवाड़ा, बूंदी, डीडवाना-कुचामन, जयपुर, खैरथल-तिजारा, कोटपुतली-बहरोड़, सीकर और टोंक सहित कई जिलों में झमाझम बारिश हुई। इस बारिश ने जहां किसानों की चिंताओं को कम किया, वहीं खरीफ की फसलों को नया जीवनदान मिल गया।
नागौर में अब तक 404.56 मिमी बारिश
नागौर जिले में इस साल एक जून से 22 अगस्त तक 404.56 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। यह सामान्य औसत 363.27 मिमी से 41.29 मिमी अधिक है। हालांकि पिछले साल की तुलना में यह आंकड़ा कमजोर है। वर्ष 2024 में इसी अवधि में 512.22 मिमी वर्षा दर्ज हुई थी, जो इस बार 107.66 मिमी कम है। यानी इस बार करीब 21 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
काली घटाओं के बीच जबरदस्त बरसात
शनिवार सुबह करीब पांच बजे नागौर जिले में आसमान पर काले बादल छा गए और कई घंटों तक मूसलाधार बारिश होती रही। दोपहर तक रुक-रुक कर बरसात का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान हवाओं के साथ बूंदाबांदी ने मौसम को सुहावना बना दिया और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली।
श्यामसर कस्बे में शुक्रवार शाम हल्की बरसात हुई थी, लेकिन शनिवार सुबह 5:30 बजे से तेज बारिश ने पूरे इलाके का नजारा बदल दिया।
खेतों में नमी, किसानों को राहत
पिछले तीन दिनों से नागौर और आसपास हल्की बरसात हो रही थी। गुरुवार शाम को 5:30 बजे 8.11 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। इस बूंदाबांदी ने खेतों में नमी बनाए रखी और तापमान को भी कम किया। हालांकि लेट मॉनसून और बारिश की कमी से जिले की करीब 90 प्रतिशत खरीफ फसलें पहले ही खराब हो चुकी थीं, लेकिन अब हुई तेज बरसात से किसानों के चेहरों पर उम्मीद की किरण जग गई है।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार, अजमेर, ब्यावर, चित्तौड़गढ़, डीडवाना-कुचामन, जयपुर, झालावाड़, करौली, कोटपुतली-बहरोड़, नागौर, पाली, सवाईमाधोपुर, टोंक और उदयपुर जिलों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश हो सकती है।
बारिश ने जहां किसानों को राहत पहुंचाई है, वहीं शहरवासियों ने भी लंबे समय बाद ठंडी हवाओं और सुहावने मौसम का आनंद लिया। ग्रामीण इलाकों में खेत-खलिहानों में पानी भरने से कृषि कार्यों की रफ्तार बढ़ने, और असर को ज्यादा उजागर किया जाए?