रोग के उपचार के साथ रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना अनिवार्य: प्रतापराव जाधव

नई दिल्ली/ नरेश गुनानी/केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयुष मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की पांचवीं बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य विषय “योग और प्राकृतिक चिकित्सा” था, जिसमें निवारक स्वास्थ्य सेवा, स्वस्थ जीवनशैली, पुनर्वास और समग्र कल्याण में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की बढ़ती प्रासंगिकता पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

​केंद्रीय राज्य मंत्री ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि रोग के केवल उपचार पर निर्भर रहने के बजाय इसकी रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने की सख्त आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और साक्ष्यों के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए।

​”परंपरा हमारी शक्ति, विज्ञान इसका प्रमाण और गुणवत्ता हमारी प्राथमिकता”

​मंत्री प्रतापराव जाधव ने आधुनिक जीवनशैली से जुड़े गैर-संचारी रोगों, तनाव और मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि योग और प्राकृतिक चिकित्सा एक समग्र, दवा-मुक्त दृष्टिकोण प्रदान करते हैं।

  • ​वृद्धावस्था में सहायक: भारत में बढ़ती बुजुर्ग आबादी को शारीरिक गतिविधि, मानसिक स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और बेहतर जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने में योग व प्राकृतिक चिकित्सा अहम भूमिका निभा सकते हैं।
  • ​संस्थागत मजबूती: सरकार मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY), योग सर्टिफ़िकेशन बोर्ड (YCB), राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान (NIN), केंद्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद (CCRYN) तथा प्राकृतिक चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड (NRB) के माध्यम से संस्थागत ढांचे को सुदृढ़ कर रही है।

​योग और प्राकृतिक चिकित्सा का बढ़ता नेटवर्क (मुख्य आंकड़े)

​आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव अलरमेलमंगई डी. ने देश में योग और प्राकृतिक चिकित्सा के विस्तार पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी:

क्षेत्र

वर्तमान स्थिति / आंकड़े

CCRYN इकाइयां

देश भर में 22 इकाइयां कार्यरत

विश्वविद्यालय व योग केंद्र

100+ विश्वविद्यालय (पाठ्यक्रम) एवं 5,000+ योग केंद्र

मान्यता प्राप्त संस्थान

113 संस्थान और 29 कार्मिक प्रमाणन निकाय

अनुसंधान आधार

10,500 से अधिक पीयर-रिव्यू और पबमेड-इंडेक्स्ड प्रकाशन

आगामी वर्षों के लिए 7 मुख्य प्राथमिकताएं

​संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में योग और प्राकृतिक चिकित्सा को सुदृढ़ करने के लिए 7 प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को रेखांकित किया गया:

  1. ​संस्थागत ढांचा: योग और प्राकृतिक चिकित्सा में शिक्षा तथा संस्थागत ढांचे को मजबूत करना।
  2. ​वैज्ञानिक अनुसंधान: दोनों प्रणालियों में वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने और अनुसंधान को बढ़ावा देना।
  3. ​मानकीकरण व प्रमाणन: योग में प्रमाणन, मान्यता और पेशेवर मानकों को सुदृढ़ करना।
  4. ​गुणवत्ता आश्वासन: प्राकृतिक चिकित्सा में पंजीकरण और गुणवत्ता मानकों को बढ़ाना।
  5. ​सामुदायिक पहुंच: समुदाय के स्तर पर निवारक और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना।
  6. ​वेलनेस टूरिज्म: भारत में वेलनेस टूरिज्म और चिकित्सा यात्रा के मुख्य घटक के रूप में इन्हें बढ़ावा देना।
  7. ​वैश्विक पहचान: वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर भारतीय योग व प्राकृतिक चिकित्सा परंपराओं को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना।

​बैठक में प्रमुख प्रतिनिधियों की उपस्थिति

​बैठक के दौरान संसद सदस्यों और विशेषज्ञ सदस्यों ने योग व प्राकृतिक चिकित्सा शिक्षा के लिए एक एकीकृत नियामक तंत्र की आवश्यकता पर सर्वसम्मति से सहमति व्यक्त की।

  • ​संसदीय समिति सदस्य: डॉ. स्वामी सचिदानंद हरि साक्षी, आष्टिकर पाटिल नागेश बापुराव, खलीलुर रहमान, नीलेश ज्ञानदेव लंके, लावु श्री कृष्ण देवरायलु (लोकसभा); घनश्याम तिवारी, सदानंद म्हालू शेट तनावडे, बाबूभाई जेसंगभाई देसाई, डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी (राज्यसभा)।
  • ​विशेष आमंत्रित सदस्य: कृष्ण प्रसाद टेनेटी, ज्योत्सना चरणदास महंत, धर्मशीला गुप्ता, रेणुका चौधरी।
  • ​वरिष्ठ अधिकारी: आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा और सलाहकार (यूनानी) डॉ. मुख्तार अहमद कासमी।

​यह बैठक ‘स्वस्थ भारत’ और ‘विकसित भारत-2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप योग और प्राकृतिक चिकित्सा को साक्ष्य-आधारित, सुलभ और निवारक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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