रैवासा धाम की ऐतिहासिक परंपरा पुनर्जीवित: उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने फिर शुरू किया ‘खिचड़ी प्रसादम’, मंदिर ट्रस्ट ने जताया आभार

रैवासा धाम की ऐतिहासिक परंपरा पुनर्जीवित: उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने फिर शुरू किया ‘खिचड़ी प्रसादम’, मंदिर ट्रस्ट ने जताया आभार

जयपुर | 27 जनवरी, 2026

| योगेश शर्मा

​जयपुर राजघराने और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल रैवासा धाम के बीच सदियों पुराने संबंधों में आज एक नया अध्याय जुड़ा। मंगलवार को रैवासा धाम स्थित श्री जानकीनाथ बड़ा मंदिर ट्रस्ट के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश की उपमुख्यमंत्री और जयपुर राजघराने की महारानी दीया कुमारी से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान ट्रस्ट द्वारा राजघराने की पुरानी परंपरा को पुनः प्रारंभ करने के निर्णय के लिए उनका अभिनंदन और साधुवाद व्यक्त किया गया।

क्या है खिचड़ी प्रसादम की परंपरा?

​रैवासा धाम, जो कि श्रीरामानन्द संप्रदाय का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र और महाराज अग्रदेवाचार्य की तपोस्थली है, के प्रति जयपुर राजघराने की सदैव अनन्य श्रद्धा रही है। पूर्व काल में राजघराने के सहयोग से यहाँ आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए नित्य ‘खिचड़ी प्रसादम’ की व्यवस्था की जाती थी।

​ट्रस्ट के उपाध्यक्ष आशीष तिवाड़ी ने जानकारी दी कि यह पवित्र परंपरा पिछले कुछ समय से निरंतर नहीं चल पा रही थी। ट्रस्ट के विनम्र अनुरोध पर दीया कुमारी ने इस लोक-कल्याणकारी परंपरा की गरिमा को समझते हुए इसे पुनः प्रारंभ करने की सहर्ष स्वीकृति प्रदान की है।

सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का संरक्षण

​प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान रैवासा धाम के ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा की। आशीष तिवाड़ी ने बताया कि इस परंपरा के दोबारा शुरू होने से न केवल श्रद्धालुओं को संबल मिलेगा, बल्कि यह जयपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को अक्षुण्ण रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

​”रैवासा धाम महाराज अग्रदेवाचार्य की दिव्य भूमि है। यहाँ खिचड़ी प्रसादम की निरंतरता श्रद्धालुओं के लिए राजघराने के समर्पण का प्रतीक थी। इसे फिर से शुरू करना समाज और आस्था के लिए एक सुखद संदेश है।” — आशीष तिवाड़ी, उपाध्यक्ष (ट्रस्ट)

 

आगामी योजनाएं

​मुलाकात के दौरान ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने मंदिर परिसर में आने वाले भक्तों की सुविधाओं और धाम के विकास से जुड़े विषयों पर भी संक्षिप्त चर्चा की। उपमुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार और राजपरिवार प्रदेश के धार्मिक स्थलों की प्राचीन गरिमा को बनाए रखने के लिए संकल्पित हैं।

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