गणपत चौहान/ खास रिपोर्ट
रायगढ़। आधुनिकता के इस दौर में जहाँ लोग फास्ट फूड की ओर भाग रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ की पावन धरा से जुड़ी ‘बोरे-बासी’ की सादगी ने एक बार फिर इंटरनेट का दिल जीत लिया है। रायगढ़ भाजपा जिला अध्यक्ष अरुणधर दीवान का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त सुर्खियां बटोर रहा है, जिसमें वे छत्तीसगढ़िया जीवन के आधार स्तंभ ‘बोरे-बासी’ का लुत्फ उठाते नजर आ रहे हैं।
जमीन पर बैठकर दिखाई सादगी
वायरल हो रही इस रील की सबसे खास बात इसकी सहजता है। वीडियो में जिला अध्यक्ष अरुणधर दीवान किसी तामझाम के बिना, जमीन पर बैठकर मिट्टी की सोंधी खुशबू के बीच पारंपरिक तरीके से बोरे-बासी का आनंद ले रहे हैं। उनके साथ थाली में मौजूद पताल (टमाटर) की चटनी, गोंदली (प्याज) और आम का अचार छत्तीसगढ़ के ग्रामीण परिवेश की सजीव तस्वीर पेश कर रहा है।
बोरे-बासी: केवल भोजन नहीं, जीवन का आधार
छत्तीसगढ़ में ‘बोरे-बासी’ का महत्व केवल एक व्यंजन तक सीमित नहीं है। यह विशेष रूप से भीषण गर्मी के दिनों में:
- शीतलता: शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में सहायक होता है।
- ऊर्जा: किसानों और मेहनतकश लोगों के लिए दिनभर की ऊर्जा का मुख्य स्रोत है।
- विरासत: यह हमारी पुरानी पीढ़ी से मिली वह सौगात है, जो आज भी प्रासंगिक है।
सोशल मीडिया पर मिली सराहना की लहर
फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इस वीडियो को हजारों लोग देख चुके हैं। नेटिजन्स इस पहल की सराहना करते हुए लिख रहे हैं कि— “जब कोई बड़ा नेता अपनी जड़ों की ओर लौटता है, तो समाज में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व का भाव जागता है।” सोशल मीडिया यूजर्स के कुछ प्रमुख कमेंट्स:
”यह केवल भोजन नहीं, हमारी छत्तीसगढ़ी अस्मिता की पहचान है।”
”सादगी और संस्कारों का अनूठा मेल, जय जोहार!”
सांस्कृतिक संदेश और राजनीतिक संकेत
जानकारों का मानना है कि इस तरह के वीडियो न केवल जनप्रतिनिधियों की ‘डाउन टू अर्थ’ (Down to Earth) छवि को मजबूत करते हैं, बल्कि स्थानीय खानपान को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का माध्यम भी बनते हैं। भाजपा जिला अध्यक्ष की यह पहल आने वाली युवा पीढ़ी को अपनी विरासत से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करने वाली है।