नरेश गुनानी
जयपुर | 11 अप्रैल, 2026
राजस्थान में औद्योगिक परिदृश्य को नई गति देने और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को धरातल पर उतारने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। रीको (RIICO) ने राजस्थान वित्त निगम (RFC) के कब्जे वाली उन संपत्तियों और भूखंडों के विक्रय के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) जारी करने की मंजूरी दे दी है, जो लंबे समय से अनुपयोगी पड़े थे।
प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेगा लाभ
रीको द्वारा राजस्थान वित्त निगम को प्रदेश के विभिन्न महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्रों में कार्यालय भवनों और आवासीय क्वार्टरों के लिए भूखंड आवंटित किए गए थे। इस निर्णय से निम्नलिखित क्षेत्रों की संपत्तियों का मार्ग प्रशस्त होगा:
- मारवाड़ एवं सीमावर्ती क्षेत्र: बालोतरा, जालौर
- हाड़ौती एवं वागड़: कोटा, बांसवाड़ा
- मेवात एवं मत्स्य क्षेत्र: अलवर, भिवाड़ी
- शेखावाटी एवं अन्य: झुंझुनूं, आबूरोड
एनओसी के लिए निर्धारित शर्तें
रीको ने पारदर्शिता और राजस्व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एनओसी को दो श्रेणियों में विभाजित कर मंजूरी दी है:
- प्रचलित दर (Prevailing Rate) वाले भूखंड: जिन संपत्तियों का आवंटन तत्कालीन बाजार दरों पर किया गया था, उनकी एनओसी तत्काल प्रभाव से जारी कर दी गई है।
- रियायती दर (Concessional Rate) वाले भूखंड: जिन भूखंडों को आरएफसी ने रियायती दरों पर प्राप्त किया था, उनके लिए शर्त रखी गई है कि आरएफसी को आवंटन के समय दी गई छूट (सब्सिडी) की राशि ब्याज सहित जमा करानी होगी।
- उपयोग की बाध्यता: यह स्पष्ट किया गया है कि भूमि का उपयोग उसी मूल उद्देश्य (जैसे कार्यालय या आवासीय) के लिए किया जा सकेगा, जिसके लिए वह आवंटित की गई थी।
आर्थिक प्रभाव: रियल एस्टेट और इंडस्ट्रियल ग्रोथ
रीको के इस निर्णय को राजस्थान की अर्थव्यवस्था के लिए एक “मास्टरस्ट्रोक” माना जा रहा है। इसके दूरगामी परिणाम निम्नलिखित होंगे:
- प्रीमियम लैंड का सदुपयोग: प्राइम लोकेशन पर स्थित ये भूखंड अब बाजार में आ सकेंगे, जिससे निवेश बढ़ेगा।
- इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: इन संपत्तियों के विक्रय के बाद संबंधित क्षेत्रों में आधुनिक कमर्शियल ऑफिस स्पेस और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स विकसित हो सकेंगे।
- राजस्व में वृद्धि: रियायती राशि की ब्याज सहित वसूली से सरकारी कोष में आय होगी।