रिवाइज्ड पेंशन अटका – तीन वर्षों से दफ्तरों के चक्कर लगा रहे सेवानिवृत्त कर्मचारी
मामला एसईसीएल रायगढ़ क्षेत्र की बरौद कालरी का, प्रबंधन की लापरवाही से बढ़ी पीड़ा
रायगढ़। 2 सितंबर 2025, गणपत चौहान, ब्यूरो चीफ़ छत्तीसगढ़,टेलीग्राफ टाइम्स।
कोल इंडिया की सहायक कंपनी एसईसीएल बिलासपुर के अंतर्गत आने वाली रायगढ़ क्षेत्र की बरौद कालरी से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारी बीते तीन वर्षों से अपने रिवाइज्ड पेंशन के इंतजार में हैं। 2021 से रिटायर हो चुके इन कर्मचारियों ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय कंपनी की सेवा में दिया, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें उनके मूलभूत अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।

कठोर परिश्रम के बाद भी अनदेखी
बरौद कालरी से रिटायर हुए ये कर्मचारी कभी इंजीनियर, फोरमेन, फिट्टर, ऑपरेटर और लिपिक जैसे पदों पर कार्यरत थे। खुले खदान क्षेत्र में धूप, बारिश और ठंड की परवाह किए बिना उन्होंने उत्पादन और संप्रेषण में अपना योगदान दिया। लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें दूध में मक्खी की तरह निकाल फेंक दिया गया।
तीन वर्षों से लंबित है रिवाइज्ड पेंशन
गत वेतन समझौते के अनुसार पेंशन की संशोधित दरें लागू होनी थीं, परंतु 20 कर्मचारियों की फाइलें अब तक अधर में लटकी हुई हैं।
- यह मामला कोल माइन प्रॉविडेंट फंड (CMPF) संगठन, क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर,
- एसईसीएल प्रबंधन रायगढ़, और
- बरौद कालरी प्रबंधन
के बीच पत्राचार में उलझा हुआ है।
पांच महीनों से लगातार पत्राचार हो रहा है, लेकिन कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
त्रासदी: तीन कर्मचारियों की हो चुकी मौत
लंबे इंतजार के बीच अब तक तीन सेवानिवृत्त कर्मचारियों की मृत्यु हो चुकी है। शेष बचे कर्मचारी लगातार मानसिक और शारीरिक तनाव झेल रहे हैं। कई की आंखें पथरा गई हैं और निराशा के कारण बीमारियों ने उन्हें घेर लिया है।
प्रभावित कर्मचारियों की सूची
रिवाइज्ड पेंशन का इंतजार कर रहे 20 सदस्य इस प्रकार हैं –
तिपन्ना कृष्णा, ए.के. अग्रवाल, विनोद कुमार सारथी, रथराम बी.पी., मोहर लाल देहरी, स्व. अंजोर सिंह, बच्छराम, मोहम्मद आलम, शिवलाल साहू, राजकुमार, नितेश चंद्रवंशी, गनपत लाल चौहान, स्व. समयलाल, हंसराज, स्व. सालिक राम कुजुर, मुकेश कुमार मोदी, गणेश राम, तेरस राम साहू, जगित राम और भरतलाल।
कर्मचारियों की चेतावनी
सेवानिवृत्त कर्मचारी अब चेतावनी दे रहे हैं कि अगर प्रबंधन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि तीन साल का इंतजार अब असहनीय हो चुका है।