रिटायर्ड कर्मचारियों का रिवाइज्ड पेंशन विवाद: “जाइए करिए आंदोलन”—महाप्रबंधक के बयान से भड़के मजदूर नेता
एसईसीएल रायगढ़ क्षेत्र के बरौद कालरी के 20 सेवानिवृत्त कर्मचारियों का मामला तीन साल से लंबित, आंदोलन की तैयारी तेज
रायगढ़, 22 सितंबर 2025।
दक्षिण पूर्व कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) रायगढ़ क्षेत्र के बरौद कालरी के सेवानिवृत्त कर्मचारियों का रिवाइज्ड पेंशन प्रकरण बीते तीन वर्षों से लंबित पड़ा है। लंबे समय से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे इन पूर्व कर्मचारियों की पीड़ा तब और बढ़ गई जब कंपनी के महाप्रबंधक अनिरुद्ध सिंह ने मजदूर नेताओं को कहा—
“जाइए करिए आंदोलन, रिवाइज्ड पेंशन के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।”
महाप्रबंधक के इस गैर-जिम्मेदाराना बयान ने मजदूर संगठनों को आक्रोशित कर दिया है। इंटक और एटक के मजदूर नेताओं ने प्रबंधन को 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि समयसीमा में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
मामला क्या है
बरौद कालरी के करीब 20 सेवानिवृत्त कर्मचारी, जिन्होंने अपना जीवन कोयला उत्पादन और कंपनी की सेवाओं में खपा दिया, वर्ष 2021 से 2023 के बीच रिटायर हुए।
- रिवाइज्ड पेंशन (एनसीडब्ल्यू-XI) की गणना और भुगतान पिछले वेतन समझौते के अनुसार किया जाना था।
- तीन साल बाद भी यह प्रक्रिया अटकी हुई है।
- रायगढ़ क्षेत्र प्रबंधन, बरौद कालरी प्रबंधन और कोयला खान भविष्य निधि संगठन (क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर) के बीच चल रहे पत्राचार के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
इस लंबित मामले के कारण कई सेवानिवृत्त कर्मचारी आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव झेल रहे हैं।
- दुःखद पहलू: बढ़े हुए पेंशन की प्रतीक्षा करते-करते तीन सदस्यों की मौत हो चुकी है।
- शेष कर्मचारी शारीरिक और मानसिक रूप से बीमारियों का सामना कर रहे हैं।
मजदूर नेताओं की नाराज़गी
दो दिन पहले मजदूर नेता गनपत चौहान और आलम खान ने महाप्रबंधक से मुलाकात कर रिवाइज्ड पेंशन प्रकरण में शीघ्र कार्रवाई की मांग की थी।
- उम्मीद थी कि प्रबंधन ठोस कदम उठाएगा,
- लेकिन महाप्रबंधक के “आंदोलन करो” जैसे बयान ने मजदूर नेताओं का गुस्सा भड़का दिया।
नेताओं ने कहा कि वे अपने साथियों के न्याय और हक के लिए आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ेंगे।
प्रभावित कर्मचारियों की सूची
तीन वर्षों से पेंशन गणना लंबित रहने वाले प्रमुख 20 कर्मचारियों में शामिल हैं:
तिपन्ना कृष्णा, ए.के. अग्रवाल, विनोद कुमार सारथी, रथराम बी.पी., मोहर लाल देहरी, स्व. अंजोर सिंह, बच्छराम, मोहम्मद आलम, शिवलाल साहू, राजकुमार, नितेश चंद्रवंशी, गनपत लाल चौहान, स्व. समयलाल, हंसराज, स्व. सालिक राम कुजुर, मुकेश कुमार मोदी, गणेश राम, तेरस राम साहू, जगित राम और भरतलाल।
इनमें कई पूर्व इंजीनियर, फोरमैन, फिटर, ऑपरेटर और लिपिक जैसे पदों पर कार्यरत रहे, जिन्होंने खुले खदान क्षेत्र में कठिन परिस्थितियों में कंपनी के उत्पादन लक्ष्यों को पूरा किया।
संवेदनशीलता पर सवाल
तीन साल से पेंशन मामले का समाधान न होना केवल प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करता है।
- मजदूर संगठनों का आरोप है कि “जिन्होंने कंपनी को अपना सर्वश्रेष्ठ समय दिया, उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद दूध में मक्खी की तरह निकाल दिया गया।”
- पेंशन की बढ़ी दर का इंतजार करते-करते कई बुजुर्गों की आंखें पथरा गई हैं और मानसिक तनाव ने उन्हें बीमार कर दिया है।
आगे की रणनीति
मजदूर नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिनों में रिवाइज्ड पेंशन का भुगतान शुरू नहीं हुआ तो वे सड़क पर उतर कर आंदोलन करेंगे।
- इसमें धरना-प्रदर्शन, विरोध रैली और चक्का जाम जैसे कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं।
- साथ ही उन्होंने प्रबंधन को चेतावनी दी कि किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए कंपनी स्वयं जिम्मेदार होगी।
