राष्ट्रीय जाट शताब्दी सम्मेलन में गूंजा एकता का संदेश
देशभर से हजारों समाजबंधु हुए शामिल, 100 वर्ष बाद फिर पुष्कर मेला स्टेडियम में जाट समाज का महाकुंभ
– पुष्कर, अजमेर | हरि प्रसाद शर्मा
पुष्कर के ऐतिहासिक मेला स्टेडियम में रविवार को राष्ट्रीय जाट शताब्दी सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। यह वही स्थल है, जहां वर्ष 1925 में जाट समाज का ऐतिहासिक सम्मेलन हुआ था। सौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस सम्मेलन में देशभर से हजारों की संख्या में समाजबंधु, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, युवा और मातृशक्ति शामिल हुए।
100 वर्ष बाद एक बार फिर पुष्कर में जाट समाज का महासंगम
सुबह 10 बजे से ही समाजबंधुओं का पुष्कर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। दोपहर तक मेला स्टेडियम पूरी तरह खचाखच भर गया। शाम 5 बजे तक चले इस सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रमुख वक्ताओं ने समाज में एकता, शिक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार जैसे विषयों पर अपने विचार रखे।
भंवरलाल आर्य: 1925 की परंपरा, 2025 में फिर जीवंत
सम्मेलन समिति के प्रमुख भंवरलाल आर्य ने बताया कि जाट समाज ने 1925 में पुष्कर में जो एकता और जागरूकता का संकल्प लिया था, आज शताब्दी वर्ष में उसी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा, “यह सम्मेलन समाज की एकजुटता, आत्मबल और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है।”
वक्ताओं ने दिया एकता और सुधार का संदेश
सम्मेलन में आए वक्ताओं ने समाज को संगठित रहने और आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
वक्ताओं ने कहा कि समाज में फैली कुरुतियों, दिखावे और संगठनात्मक विभाजन को खत्म करना समय की जरूरत है।
युद्धवीरसिंह के भाषण पर विवाद, पुलिस को करना पड़ा हस्तक्षेप
कार्यक्रम के दौरान एक क्षण के लिए माहौल गरमा गया जब राष्ट्रीय जाट महासभा के महासचिव युद्धवीरसिंह निर्धारित समय से अधिक वक्तव्य देने लगे। आयोजन समिति ने जब उन्हें रोका तो उनके समर्थक मंच पर चढ़कर विरोध करने लगे।
स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसके बाद समाज के वरिष्ठ जनों ने समझाइश कर माहौल शांत किया। तत्पश्चात युद्धवीरसिंह का संबोधन पुनः शुरू हुआ।
अपने संबोधन में युद्धवीरसिंह ने कहा कि समाज के नाम पर अनेक संगठन बन रहे हैं, जिससे एकता कमजोर हो रही है। उन्होंने कहा, “जाट समाज तभी प्रगति करेगा जब संगठन एक रहेगा। समाज के नाम पर अपनी दुकानें चलाने वाले लोगों को अब जवाब देना होगा।”
अराजनैतिक सम्मेलन में छाया राजनीति का रंग
हालांकि समिति ने घोषणा की थी कि यह सम्मेलन पूरी तरह अराजनैतिक रहेगा, लेकिन कुछ वक्ताओं के संबोधन ने मंच पर राजनीतिक रंग चढ़ा दिया। बावजूद इसके, मंच पर मौजूद वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि समाज का उद्देश्य किसी दल विशेष से जुड़ना नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक उत्थान की दिशा में आगे बढ़ना है।
दस विशेष प्रस्ताव हुए पारित
सम्मेलन के दौरान देशभर से आए करीब 500 मुख्य वक्ताओं द्वारा तैयार किए गए 10 विशेष प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित किया गया। इनमें प्रमुख बिंदु रहे:
- जाट चैंबर ऑफ कॉमर्स का गठन – समाज के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और विदेश में पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना।
- कृषि अनुसंधान समिति – किसानों के हित में अनुसंधान कर कृषि को अधिक लाभदायक बनाना।
- शैक्षणिक और सामाजिक संस्थानों का सदुपयोग – समाज की धर्मशालाओं व छात्रावासों को जनहित में प्रभावी रूप से संचालित करना।
- सामाजिक सुधार समिति – समाज में व्याप्त कुरीतियों, नशाखोरी, खर्चीले आयोजनों आदि को रोकने हेतु अभियान चलाना।
- युवा प्रकोष्ठ का गठन – युवाओं को नेतृत्व और रोजगार के अवसरों से जोड़ना।
सम्मेलन ने जगाया आत्मगौरव
शताब्दी सम्मेलन में समाज के वरिष्ठों ने 100 वर्षों में जाट समाज द्वारा शिक्षा, राजनीति, रक्षा, खेल और कृषि जैसे क्षेत्रों में हासिल की गई उपलब्धियों को याद करते हुए उनका सम्मान किया। वक्ताओं ने कहा कि समाज की युवा पीढ़ी को अपने इतिहास से प्रेरणा लेकर भविष्य की चुनौतियों का सामना करना चाहिए।
सम्मेलन का समापन एकता संकल्प के साथ
कार्यक्रम का समापन समाजबंधुओं द्वारा लिए गए इस संकल्प के साथ हुआ कि जाट समाज जातीय सीमाओं से ऊपर उठकर शिक्षा, संगठन और स्वावलंबन के पथ पर आगे बढ़ेगा।