जयपुर के पाथेय भवन में सिन्धू दर्शन तीर्थयात्रा 2026 के यात्रियों का भव्य अभिनंदन व विदाई समारोह आयोजित
- जयपुर से 37, उदयपुर से 11, बांसवाड़ा से 10, बाड़मेर व बालोतरा से 9, अजमेर से 8 और अलवर से 6 यात्रियों सहित राजस्थान से कुल 81 तीर्थयात्रियों का जत्था हो रहा है रवाना
जयपुर। योगेश शर्मा
“सिन्धू दर्शन तीर्थयात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह हमारे राष्ट्रीय गौरव, अखंडता और स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक है। लेह-लद्दाख की पावन भूमि पर सिन्धू नदी का दर्शन हमें अपनी जड़ों और समृद्ध सनातन संस्कृति से जोड़ता है।” यह विचार भारतीय सिन्धू सभा के संरक्षक मोहनलाल वाधवाणी ने व्यक्त किए। वे पाथेय भवन, जयपुर में ‘सिन्धू दर्शन तीर्थयात्रा 2026’ में सम्मिलित होने वाले तीर्थयात्रियों के लिए आयोजित भव्य विदाई एवं अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। भारतीय सिन्धू सभा की ओर से आयोजित होने वाली इस यात्रा में देश भर से सनातन धर्म प्रेमी मिलकर भाग लेते हैं।
श्री वाधवाणी ने यात्रियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि सिन्धू नदी के उद्गम स्थल पर दर्शन और पूजा-अचना कर तीर्थयात्री अपना जीवन सफल बना रहे हैं। उन्होंने यात्रियों से आह्वान किया कि वे सिन्धू माता का पवित्र जल अपने साथ लेकर आएं, ताकि परिवार व सहयोगियों के साथ उसका उपयोग किया जा सके और स्थानीय देवालयों में भी उस पवित्र जल के कलश स्थापित किए जा सकें।
राजस्थान से 81 यात्रियों का जत्था हो रहा है रवाना
भारतीय सिन्धू सभा के प्रदेश प्रभारी महेन्द्र कुमार तीर्थाणी ने यात्रा की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष की तीर्थयात्रा में प्रदेश प्रचार प्रमुख मूलचन्द बसंताणी के नेतृत्व में राजस्थान से यात्रियों का जत्था सम्मिलित हो रहा है। संख्या बल की बात करें तो जयपुर से 37, उदयपुर से 11, बांसवाड़ा से 10, बाड़मेर व बालोतरा से 9, अजमेर से 8 और अलवर से 6 यात्रियों सहित राजस्थान से कुल 81 तीर्थयात्रियों का जत्था सम्मिलित हो रहा है। जयपुर के अलावा प्रदेश के अन्य सभी संबंधित शहरों में भी यात्रियों के लिए भव्य विदाई समारोह आयोजित किए जा रहे हैं।
🗺️ जम्मू से शुरू होगा सफर, इन प्रमुख स्थलों से गुजरेगी यात्रा
यह यात्रा सड़क और हवाई, दोनों मार्गों से लेह-लद्दाख पहुंचेगी। यात्रा का पूरा रूट बेहद रोमांचक और आध्यात्मिक महत्व से भरपूर है:
- 31 मई (जम्मू): जम्मू पहुंचने पर यात्रियों का भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया जाएगा। यहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ सभी यात्रियों को उनके परिचय पत्र (ID Cards) और यात्रा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी।
- यात्रा मार्ग: जम्मू से प्रस्थान कर यह यात्रा श्रीनगर, गुलमर्ग, सोनमर्ग, कारगिल, मैगनेटिक हिल और सुप्रसिद्ध ‘श्री पत्थर साहिब गुरुद्वारा’ होते हुए लेह-लद्दाख की पावन धरा पर पहुंचेगी।
लेह-लद्दाख में होंगे भव्य धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजन
मुख्य धार्मिक आयोजन 5 से 8 जून तक लेह-लद्दाख में आयोजित होगा, जहां देश भर से आए सांस्कृतिक दल और सनातन धर्मी एकजुट होंगे। इस दौरान निम्नलिखित विशेष अनुष्ठान होंगे:
- सिन्धी समाज के आराध्य देव सांईं झूलेलाल जी का भव्य बहिराणा साहब सजाया जाएगा।
- सिन्धू नदी के तट पर विशेष पूजन, महाआरती और पल्लव प्रार्थना की जाएगी।
- अलग-अलग प्रदेशों से आए सांस्कृतिक दलों द्वारा रंगारंग और लोक संस्कृतियों से ओत-प्रोत प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
समारोह में गणमान्य जनों की उपस्थिति
जयपुर में आयोजित इस अभिनंदन समारोह के दौरान भारतीय सिन्धू सभा के प्रदेशाध्यक्ष ईश्वरलाल मोरवाणी, मातृशक्ति की प्रदेशाध्यक्ष शोभा बसंताणी, जयपुर संरक्षक विष्णुदेव सामताणी, संभाग प्रभारी अशोक छाबडा, सह संभाग प्रभारी नारायण परनाणी और कार्यालय मंत्री किशनचन्द भागवाणी सहित समाज के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी व प्रबुद्ध कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने यात्रियों को माला पहनाकर और तिलक लगाकर मंगलमय यात्रा की कामना के साथ विदा किया।