गनपत चौहान
नई दिल्ली: केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने ‘राष्ट्रीय खेल महासंघ सम्मेलन 2026’ की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में भारतीय ओलंपिक संघ सहित 37 राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी एशियाई खेल 2026, राष्ट्रमंडल खेल 2026 और लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए भारत की तैयारियों को पुख्ता करना और खेल इकोसिस्टम में बड़े सुधार लाना रहा।

एथलीट-केंद्रित शासन और पारदर्शिता पर जोर
सम्मेलन को संबोधित करते हुए खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि भारतीय खेल का भविष्य खिलाड़ियों, महासंघों और सरकारों के बीच मजबूत समन्वय पर टिका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक संघ का प्राथमिक ध्यान ‘एथलीट कल्याण’ और ‘एथलीट-केंद्रित शासन’ होना चाहिए।
डॉ. मांडविया ने खेल संघों में अधिक पारदर्शिता, समय पर चुनाव और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मजबूत संस्थागत तंत्र की मांग की। उन्होंने कहा कि आगामी वैश्विक आयोजनों के लिए भारत की तैयारी एक समन्वित कदम है, जिसमें दीर्घकालिक योजना और वैज्ञानिक प्रशिक्षण की मुख्य भूमिका होगी।
डोपिंग के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
खेल मंत्री ने भारतीय खेल जगत से डोपिंग को जड़ से खत्म करने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वच्छ और पारदर्शी खेल संस्कृति के निर्माण के लिए सख्त कानूनी उपाय और जागरूकता आवश्यक है। उन्होंने महासंघों, प्रशिक्षकों और सहायक कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे देश की खेल छवि को स्वच्छ बनाए रखने में सक्रिय योगदान दें।
राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम 2025 का विमोचन
इस अवसर पर डॉ. मांडविया ने ‘राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम 2025’ के नियम और सुधार दिशानिर्देश पुस्तिका का औपचारिक विमोचन किया। यह पुस्तिका संघों के लिए अधिक जवाबदेही, निष्पक्ष चयन प्रक्रियाओं और संस्थागत समर्थन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
प्रमुख रणनीतिक बिंदु:
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण: खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने कहा कि भारत की प्रगति प्रदर्शन आधारित और विज्ञान द्वारा संचालित होगी।
- 2036 का लक्ष्य: खेल सचिव हरि रंजन राव ने बताया कि आज की जा रही चर्चाएं और तैयारियां 2036 के लिए भारत के खेल भविष्य को आकार देंगी।
- बुनियादी ढांचा और समर्थन: खेलो इंडिया, फिट इंडिया और आगामी ‘खेलो भारत मिशन’ के माध्यम से प्रशिक्षण प्रणालियों और इन्फ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक स्तर का बनाया जाएगा।
- निजी भागीदारी: पदक जीतने की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए खेल लीग, अकादमियों और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा।
सम्मेलन के मुख्य विषय
सम्मेलन के दौरान ‘खेलो इंडिया मिशन मेडल रणनीति’, खेल सामग्री निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग), वैज्ञानिक फिटनेस प्रोटोकॉल, डोपिंग विरोधी कानूनों को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय महासंघों में भारत का प्रतिनिधित्व बढ़ाने जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई।
अंत में, सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि वह खुली और निष्पक्ष चयन प्रणाली सुनिश्चित करने तथा एथलीटों व प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण में निवेश बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।