
| नरेश गुनानी
जयपुर, 18 जनवरी 2026 राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) के उपरांत दो दिवसीय जयपुर प्रवास पर आए अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल ने आज गुलाबी नगरी की ऐतिहासिक धरोहर अल्बर्ट हॉल संग्रहालय का भ्रमण किया। 40 देशों के 120 सदस्यीय इस उच्च स्तरीय दल ने राजस्थान की स्थापत्य कला और विश्व इतिहास के दुर्लभ संग्रह की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
भव्य स्वागत और वास्तुकला का परिचय
अल्बर्ट हॉल पहुँचने पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का पारंपरिक राजस्थानी तिलक और माला पहनाकर भव्य स्वागत किया गया। विशेषज्ञों और गाइडों ने प्रतिनिधियों को संग्रहालय की अद्वितीय इंडो-सरसेनिक वास्तुकला के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रतिनिधियों को बताया गया कि कैसे यह भवन हिंदू, इस्लामी और नव-गॉथिक शैलियों का एक उत्कृष्ट मिश्रण है।
प्रमुख आकर्षण: ममी से लेकर ईरानी कालीन तक
भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने संग्रहालय की विभिन्न दीर्घाओं (गैलरी) का अवलोकन किया। विशेष रूप से निम्नलिखित आकर्षणों ने उन्हें प्रभावित किया:
- मिस्र की ममी: संग्रहालय के सबसे दुर्लभ संग्रह में से एक प्राचीन मिस्र की ममी को देखकर प्रतिनिधि चकित रह गए।
- ईरानी चारबाग कालीन: 16वीं शताब्दी के दुर्लभ और विशाल कालीन की कलाकारी ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का ध्यान खींचा।
- विरासत और शिल्प: पारंपरिक वाद्य यंत्र, नक्काशीदार काष्ठ (लकड़ी) की कलाकृतियाँ और विभिन्न देशों की सभ्यताओं के सिक्कों के संग्रह को प्रतिनिधियों ने सांस्कृतिक चेतना का उत्कृष्ट केंद्र बताया।
राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान की वैश्विक प्रशंसा
प्रतिनिधिमंडल में शामिल विभिन्न विधायिकाओं के अध्यक्षों और संसदीय अधिकारियों ने अल्बर्ट हॉल को न केवल एक संग्रहालय, बल्कि विश्व इतिहास को जोड़ने वाला एक सजीव सेतु करार दिया। उन्होंने कहा कि राजस्थान की यह विरासत यह सिद्ध करती है कि यह प्रदेश केवल शौर्य ही नहीं, बल्कि कला और संरक्षण के प्रति भी विश्व में अग्रणी है।
प्रवास का मुख्य उद्देश्य
उल्लेखनीय है कि यह प्रतिनिधिमंडल 17 और 18 जनवरी को जयपुर के प्रवास पर है। शनिवार को रात्रिभोज और सांस्कृतिक संध्या के आनंद के बाद आज का यह भ्रमण प्रतिनिधियों को राजस्थान की जमीनी संस्कृति और वैश्विक इतिहास से रूबरू कराने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। भ्रमण के दौरान प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों सहित पुरातत्व विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे।

