रायपुर: वन विभाग का विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम; अब अपराधियों पर होगी सख्त कानूनी स्ट्राइक

रायपुर, 03 जनवरी 2026
| रिपोर्ट गणपत चौहान छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में अवैध शिकार और वन्यजीव अपराधों पर लगाम लगाने के लिए वन विभाग ने अब कानूनी मोर्चे पर अपनी तैयारी तेज कर दी है। अक्सर देखा गया है कि मैदानी स्तर पर अपराधी पकड़े तो जाते हैं, लेकिन कानूनी बारीकियों और प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी न होने के कारण केस कमजोर रह जाता है, जिससे अपराधी बच निकलते हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए वन विभाग अब अपने कर्मचारियों को ‘विधिक रूप से सशक्त’ बनाने के अभियान में जुट गया है।
”प्रोटेक्ट टुडे एंड सिक्योर टुमारो”: कानूनी साक्षरता से सुरक्षा
वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में दुर्ग वनमंडल कार्यालय में “प्रोटेक्ट टुडे एंड सिक्योर टुमारो” परियोजना के तहत एक दिवसीय कार्यशाला संपन्न हुई।
यह आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के सहयोग से किया गया। इसमें जिला न्यायालय दुर्ग के काउंसलर चंद्राकर ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की और वनकर्मियों को वन्यजीव संरक्षण से जुड़े जटिल कानूनों की जानकारी दी।
प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु और रणनीतियां
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वन अधिकारियों और कर्मचारियों को कानूनी रूप से इतना दक्ष बनाना है कि उनके द्वारा तैयार किया गया हर केस न्यायालय में टिक सके। प्रशिक्षण के दौरान निम्नलिखित विषयों पर गहन चर्चा हुई:
- अधिनियमों की विस्तृत जानकारी: भारतीय वन अधिनियम, 1927 और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की महत्वपूर्ण धाराओं का विश्लेषण।
- प्रकरण निर्माण में मजबूती: साक्ष्य जुटाने और जब्तीनामा तैयार करने की सही प्रक्रिया, ताकि अपराधियों को सजा सुनिश्चित हो सके।
- क्षेत्रीय अधिकार: आरक्षित, संरक्षित और राजस्व क्षेत्रों में होने वाले अपराधों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के अंतर और प्रक्रियाओं को स्पष्ट किया गया।
- न्यायालयीन प्रबंधन: अदालती कार्यवाही के दौरान ‘क्या करें और क्या न करें’ (Do’s and Don’ts) पर विशेषज्ञों द्वारा व्यावहारिक सुझाव दिए गए।
जमीनी स्तर पर दिखेगा असर
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में वन परिक्षेत्र अधिकारी दुर्ग एवं धमधा सहित वनमंडल के सभी कार्यपालिक और क्षेत्रीय अधिकारी उपस्थित रहे। विभाग का मानना है कि जब वनकर्मी विधिक रूप से सजग होंगे, तभी वन संपदा और वन्यजीवों की सुरक्षा वास्तविक रूप में सुनिश्चित हो पाएगी।
समय-समय पर संशोधित हो रहे नियमों और विधिक प्रावधानों से अपडेट रहने के लिए विभाग भविष्य में भी ऐसी कार्यशालाएं आयोजित करता रहेगा। इस पहल से आने वाले समय में वन अपराधों के मामलों में दोषसिद्धि (Conviction) की दर बढ़ने की उम्मीद है।

