- Ganpat chauhan / State Head – Chhattisgarh
एक हेक्टेयर में टमाटर की खेती से ₹6 लाख की हो रही सालाना आय; मिरचिद गांव बना सब्जी उत्पादन का नया हब।
रायपुर | 5 अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ के बिलाईगढ़ विकासखंड में महानदी के तट पर स्थित ग्राम मिरचिद आज कृषि क्षेत्र में एक रोल मॉडल के रूप में उभर रहा है। यहाँ के किसानों ने धान जैसी पारंपरिक फसलों के मोह को छोड़कर नकदी फसलों की ओर कदम बढ़ाए हैं। इस परिवर्तन के केंद्र में हैं लेखराम केवट, जिनकी मेहनत और उन्नत खेती के तरीकों ने उन्हें क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है।
15 वर्षों का अनुभव और ‘लक्ष्मी’ का साथ
लेखराम केवट पिछले डेढ़ दशक से टमाटर की खेती से जुड़े हैं। वे बताते हैं कि सही किस्म का चुनाव ही सफलता की पहली सीढ़ी है। वर्तमान में वे मुख्य रूप से “लक्ष्मी वैरायटी” के टमाटर उगा रहे हैं। इस किस्म की खासियत इसकी बेहतर शेल्फ-लाइफ और बाजार में अधिक मांग है।
आर्थिक सफलता के आंकड़े
लेखराम की सफलता केवल शब्दों में नहीं, बल्कि आंकड़ों में भी साफ झलकती है:
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विवरण |
आंकड़े (अनुमानित) |
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कृषि क्षेत्र |
लगभग 2.5 एकड़ (1 हेक्टेयर) |
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दैनिक उत्पादन |
100 कैरेट टमाटर |
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मासिक आय |
₹50,000 से अधिक |
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वार्षिक कुल आय |
₹6,00,000 |
पारिवारिक श्रम से कम हुई लागत
लेखराम की खेती की सबसे बड़ी विशेषता उनका बिजनेस मॉडल है। वे किसी बाहरी मजदूर पर निर्भर रहने के बजाय अपने परिवार के साथ मिलकर खेत की देखरेख, तुड़ाई और पैकेजिंग का कार्य करते हैं। इससे न केवल मजदूरी की लागत में भारी कमी आती है, बल्कि परिवार के सदस्यों को गाँव में ही सम्मानजनक रोजगार भी मिल रहा है।
मंडियों में बढ़ती साख
मिरचिद गांव की मिट्टी और किसानों की मेहनत का परिणाम है कि यहाँ का टमाटर अब केवल स्थानीय हाट-बाजारों तक सीमित नहीं है। लेखराम द्वारा उत्पादित टमाटर की सप्लाई रायगढ़ और शिवरीनारायण जैसी बड़ी मंडियों में हो रही है। व्यापारियों के बीच यहाँ के टमाटर की गुणवत्ता की विशेष धाक है।
मिरचिद: सब्जी उत्पादन का उभरता केंद्र
लेखराम केवट की सफलता ने पूरे गांव की तस्वीर बदल दी है। आज मिरचिद गांव के लगभग 50 एकड़ से अधिक क्षेत्र में टमाटर की खेती की जा रही है। आधुनिक कृषि तकनीकों और बेहतर सिंचाई सुविधाओं का उपयोग कर यहाँ के किसान अब आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहे हैं।
