रायपुर: छेरछेरा तिहार – सामाजिक समरसता और लोक संस्कृति का अनूठा उत्सव

| रिपोर्ट गणपत चौहान छत्तीसगढ़
रायपुर, 03 जनवरी 2026 छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परंपराओं के प्रतीक छेरछेरा तिहार के अवसर पर आज प्रदेश में उत्साह और उल्लास का वातावरण रहा। इस खास मौके पर राज्य के राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने धरसींवा विकासखंड के ग्राम तरपोंगी में पारंपरिक रूप से घर-घर जाकर अन्न दान ग्रहण किया और इस लोक परंपरा का निर्वहन किया।
लोक परंपरा में दान और समर्पण की मिसाल
ग्राम तरपोंगी पहुंचे मंत्री टंक राम वर्मा ने ग्रामीणों से आत्मीय भेंट की। उन्होंने झोला फैलाकर पारंपरिक रूप से ‘छेरछेरा’ मांगा और ग्रामीणों द्वारा दिए गए अन्न दान को स्वीकार किया। इस दौरान पूरा गांव अपनत्व और लोक संस्कृति के रंगों में सराबोर नजर आया।
इस अवसर पर टंक राम वर्मा ने कहा:
”छेरछेरा तिहार छत्तीसगढ़ की आत्मा से जुड़ा पर्व है। यह समाज में समानता, सहयोग और दान की भावना को सशक्त करता है। यह केवल अन्न संग्रह का त्योहार नहीं, बल्कि भाईचारे और मानवीय संवेदनाओं का उत्सव है। हमारी लोक परंपराएं ही हमारी असली पहचान हैं, जिन्हें संजोकर रखना हम सभी का साझा दायित्व है।”
गांवों में छेरछेरा की रौनक
तरपोंगी में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। ग्रामीणों ने पारंपरिक गीतों और वाद्ययंत्रों के साथ मंत्री का स्वागत किया। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे, जो इस उत्सव के माध्यम से सामाजिक समरसता का संदेश देते नजर आए।
क्यों खास है छेरछेरा तिहार?
छेरछेरा छत्तीसगढ़ का एक अत्यंत लोकप्रिय कृषि आधारित पर्व है। इसके बारे में कुछ प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:
- समय: यह पर्व धान की कटाई के बाद पौष मास (दिसंबर-जनवरी) में मनाया जाता है।
- उद्देश्य: फसल कटने के बाद किसान ईश्वर और समाज के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हैं।
- परंपरा: इस दिन बच्चे और युवा टोलियां बनाकर घर-घर जाते हैं और “छेरछेरा छेरछेरा, माई कोठी के धान ला हेरा…” का गायन करते हैं। इसका अर्थ है कि माता के भंडार से थोड़ा दान प्रदान करें।
- सामाजिक प्रभाव: दान में मिली सामग्री का उपयोग सामूहिक भोज या जरूरतमंदों की सहायता के लिए किया जाता है।