रायगढ़ मेडिकल कॉलेज ने आधुनिक एनेस्थीसिया तकनीक में हासिल की महत्वपूर्ण उपलब्धि
रायगढ़, 30 अगस्त 2025। गणपत चौहान ब्यूरो चीफ़, छत्तीसगढ़ ,टेलीग्राफ टाइम्स
राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और उन्नयन निरंतर जारी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। इसी कड़ी में रायगढ़ का स्व. लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं उससे संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति शासकीय चिकित्सालय ने एनेस्थीसिया तकनीक के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
अधिष्ठाता डॉ. विनीत जैन और अस्पताल अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार मिंज के मार्गदर्शन में एनेस्थीसिया विभाग ने एक जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। स्तन कैंसर (Carcinoma Breast) से पीड़ित 48 वर्षीय महिला का मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी (MRM) एवं लिम्फ नोड डिसेक्शन बिना जनरल एनेस्थीसिया (GA) के, केवल थोरैसिक एपिड्यूरल ब्लॉक तकनीक द्वारा किया गया।
थोरैसिक एपिड्यूरल ब्लॉक क्या है
यह एक आधुनिक रीजनल एनेस्थीसिया तकनीक है, जिसमें पीठ के ऊपरी हिस्से (Thoracic Region) में दवा देकर संबंधित हिस्से को सुन्न किया जाता है। इस पद्धति में मरीज पूरी तरह बेहोश नहीं होता, बल्कि होश में रहते हुए बातचीत कर सकता है और सामान्य रूप से सांस ले सकता है।
इससे जनरल एनेस्थीसिया से जुड़ी संभावित जटिलताओं जैसे – मतली, चक्कर, श्वसन अवरोध और लंबी रिकवरी – से बचाव संभव होता है।
ऑपरेशन के दौरान सफलता
ऑपरेशन मेडिकल कॉलेज रायगढ़ के सर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग की टीम द्वारा किया गया। पूरी सर्जरी के दौरान मरीज सजग रहीं और उनकी शारीरिक गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी गई। विशेष बात यह रही कि ऑपरेशन के बाद भी दर्द निवारण के लिए उसी एपिड्यूरल कैथेटर से दवाएं दी जाती रहीं, जिससे मरीज को सुरक्षित और आरामदायक अनुभव मिला।
इस सर्जरी का नेतृत्व एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. ए.एम. लकड़ा और उनकी टीम ने किया, जिन्होंने अपनी दक्षता और सूझबूझ से यह उपलब्धि संभव बनाई।
बेहतर रिकवरी और नई दिशा
रायगढ़ मेडिकल कॉलेज की यह उपलब्धि बताती है कि अब छोटे से लेकर जटिल ऑपरेशन भी आधुनिक क्षेत्रीय एनेस्थीसिया तकनीकों से सुरक्षित रूप से किए जा सकते हैं। इससे मरीजों की रिकवरी तेज होती है, आईसीयू में भर्ती होने की आवश्यकता कम पड़ती है और मरीज मानसिक रूप से भी अधिक स्थिर रहते हैं।
गौरतलब है कि थोरैसिक एपिड्यूरल ब्लॉक जैसी तकनीकें प्रायः बड़े शहरों और महानगरों में ही उपलब्ध होती थीं। अब रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में भी इनका सफल उपयोग होना, पूरे रायगढ़–जशपुर अंचल सहित आसपास के जिलों के मरीजों के लिए वरदान साबित होगा।