कुड़ेकेला / रायगढ़। बुधराम अग्रवाल
रायगढ़ जिले में लगातार गहराते जल संकट और तेजी से नीचे गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अख्तियार किया है। जिला दंडाधिकारी ने एक ऐसा सख्त फरमान जारी किया है, जिसने अवैध नलकूप खनन करने वाले माफियाओं के हौसले पस्त कर दिए हैं। इस बार प्रशासन ने सीधे उस जीवन-रेखा (सप्लाई लाइन) पर प्रहार किया है, जिसके बिना ये भारी-भरकम बोरिंग मशीनें एक इंच भी आगे नहीं बढ़ सकतीं— यानी कि गाड़ियों का मुख्य ईंधन, डीजल।
अवैध खनन के ‘खेल’ को जड़ से खत्म करने का मास्टरस्ट्रोक
जिले में भीषण गर्मी और पेयजल के गंभीर संकट को देखते हुए सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना नलकूप (बोरिंग) खनन पर पहले से ही पूर्ण प्रतिबंध लागू है। इसके बावजूद, कुछ रसूखदार और बोरिंग माफिया चोरी-छिपे निजी वाहनों के जरिए धड़ल्ले से अवैध खनन को अंजाम दे रहे थे। हालांकि, प्रशासन लगातार कार्रवाई करते हुए कई गाड़ियां जब्त भी कर चुका है, लेकिन इस अवैध कारोबार को पूरी तरह जमींदोज करने के लिए जिला प्रशासन ने यह नया मास्टरस्ट्रोक खेला है।
पेट्रोल पंपों को सख्त हिदायत: ‘नो परमिशन, नो डीजल’
ये विशालकाय बोरिंग मशीनें और वाहन परिचालन व खनन के दौरान भारी मात्रा में डीजल की खपत करते हैं। इनके पहियों को पूरी तरह थामने के लिए अब जिले के सभी पेट्रोल पंपों पर नकेल कस दी गई है। जिला दंडाधिकारी द्वारा जारी नए आदेश के तहत निम्नलिखित कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं:
- डीजल बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध: रायगढ़ जिले की सीमा के भीतर आने वाले सभी पेट्रोल-डीजल पंपों से किसी भी निजी बोरिंग मशीन या वाहन को डीजल देने पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
- लिखित अनुमति अनिवार्य: यदि किसी बोरिंग वाहन को किसी अति-आवश्यक या स्वीकृत कार्य के लिए ईंधन की आवश्यकता है, तो उसे सबसे पहले सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किया गया वैध लिखित अनुमति पत्र दिखाना होगा।
- पंप संचालकों पर गिरेगी गाज: यदि कोई पेट्रोल पंप संचालक बिना वैध अनुमति पत्र के किसी भी निजी बोरिंग गाड़ी में तेल भरता पाया गया, तो उस पंप को सील करने सहित संचालक के खिलाफ सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
भू-जल चोरों के खिलाफ चौतरफा नाकेबंदी
प्रशासन के इस कड़े और अभूतपूर्व रुख से यह साफ हो गया है कि इस सीजन में पानी की एक-एक बूंद को सहेजना और भू-जल का संरक्षण करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। चंद रुपयों के लालच में नियमों को ताक पर रखकर धरती का सीना चीरने वाले बोरिंग माफिया के लिए अब रायगढ़ जिले में छिपकर काम करना नामुमकिन होगा। बिना तेल के ये मशीनें अब कबाड़ में तब्दील होने की कगार पर हैं, जिससे अवैध खनन पर पूरी तरह लगाम लगने की उम्मीद है।