रायगढ़ में ‘कानून का सिंहनाद’ — अपराधियों के लिए काल और जनता के लिए ढाल बने एसएसपी शशिमोहन सिंह

गनपत चौहान 

रायगढ़। किसी भी जिले की प्रगति वहां की सुरक्षित कानून व्यवस्था पर निर्भर करती है। रायगढ़ जिले में पिछले कुछ समय से सुरक्षा और सुशासन का एक ऐसा अध्याय लिखा जा रहा है, जिसने अपराधियों की नींद उड़ा दी है। इस बदलाव के सूत्रधार हैं एसएसपी शशिमोहन सिंह (IPS)। बिना किसी अनावश्यक शोर-शराबे और प्रचार के, उन्होंने अपनी कार्यशैली से यह स्पष्ट कर दिया है कि वर्दी की धमक केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं, बल्कि अपराधियों के दिलो-दिमाग तक पहुंचनी चाहिए।

दिखावा कम, कार्रवाई ज्यादा: पुलिसिंग का नया मॉडल

​एसएसपी शशिमोहन सिंह की सबसे बड़ी पहचान उनकी ‘रिजल्ट ओरिएंटेड’ (परिणामोन्मुखी) कार्यशैली है। रायगढ़ की कमान संभालने के बाद उन्होंने कैमरों के सामने चमकने के बजाय जमीन पर काम करने को प्राथमिकता दी। उनकी कार्यप्रणाली में अनावश्यक बयानबाजी की जगह ठोस रणनीतियों ने ली है, जिसका सीधा असर जिले की क्राइम रेट और अपराधियों के मनोबल पर पड़ रहा है।

प्रमुख रणनीतिक प्रहार: आघात, अंकुश और प्रहार

​जिले से अपराध की जड़ें खोदने के लिए एसएसपी ने त्रि-स्तरीय रणनीति अपनाई है। इन अभियानों ने संगठित अपराध की कमर तोड़ दी है:

  • अभियान ‘आघात’ व ‘अंकुश’: सट्टा, जुआ, कबाड़ और अवैध नशे के कारोबार पर इस कदर लगाम कसी गई है कि वर्षों से जमे माफिया अब जिला छोड़ने पर मजबूर हैं।
  • साइबर और गंभीर अपराध: हत्या, लूट और अपहरण जैसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों की धरपकड़ ने पुलिस की विश्वसनीयता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।
  • निगरानी तंत्र: थाना स्तर पर जवानों की जवाबदेही तय की गई है, जिससे पुलिसिंग में कसावट आई है।

आमजन का भरोसा: सुरक्षित महिलाएं, निडर व्यापारी

​पुलिस का असली पैमाना जनता का फीडबैक होता है। आज रायगढ़ के बाजारों में व्यापारी निडर होकर व्यापार कर रहे हैं और महिलाएं सार्वजनिक स्थानों पर स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रही हैं।

“लंबे समय बाद रायगढ़ में ऐसा माहौल बना है कि आम आदमी पुलिस को शिकायत करने में हिचकता नहीं, बल्कि उसे अपने रक्षक के रूप में देखता है।” — यह राय आज जिले के प्रबुद्ध नागरिकों की है।

 

सोशल पुलिसिंग: खाकी के प्रति बढ़ता सम्मान

​शशिमोहन सिंह केवल एक सख्त प्रशासक ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील इंसान भी हैं। उन्होंने ‘सोशल पुलिसिंग’ के जरिए खाकी और आवाम के बीच की खाई को पाटने का काम किया है।

  • खेल और युवा जुड़ाव: खेल आयोजनों के माध्यम से युवाओं को पुलिस से जोड़ना।
  • जागरूकता अभियान: साइबर सुरक्षा और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जनता को जागरूक करना।
  • संवेदनशीलता: पीड़ितों की सुनवाई में तत्परता और मृदु व्यवहार।

निष्कर्ष: संकल्पित नेतृत्व का परिणाम

​एसएसपी शशिमोहन सिंह ने यह साबित कर दिया है कि यदि नेतृत्व ईमानदार, निडर और संकल्पित हो, तो व्यवस्था को बदलने में वक्त नहीं लगता। आज रायगढ़ में “कानून का शासन” महज एक जुमला नहीं, बल्कि हकीकत है। अपराधियों में खौफ और सज्जनों में सुरक्षा का भाव पैदा कर उन्होंने पुलिस विभाग के गौरव को पुनर्स्थापित किया है।

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