रायगढ़ मरीन ड्राइव अतिक्रमण विवाद पर कांग्रेस ने खोला मोर्चा, बनाई जांच टीम
घर तोड़े जाने की कार्रवाई पर सियासत गरमाई, कांग्रेस ने भेजी उच्चस्तरीय टीम, रिपोर्ट सौंपेगी प्रदेश नेतृत्व को
Edited By : गणपत चौहान
टेलीग्राफ टाइम्स
जून 15,2025
रायगढ़, छत्तीसगढ़।
मरीन ड्राइव परियोजना के तहत रायगढ़ शहर के जेलपारा और प्रगति नगर क्षेत्र में हो रही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ने बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे बुलडोजर अभियान का कांग्रेस ने खुलकर विरोध किया है। शनिवार सुबह जब निगम का अमला घरों को तोड़ने पहुंचा, तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मोर्चा संभालते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान कई नेता हिरासत में
इस विरोध के दौरान कांग्रेस के पूर्व विधायक प्रकाश नायक, जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनिल शुक्ला, सहित कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए सीधे घरों को तोड़ना शुरू कर दिया, जिससे कई परिवार बेघर हो गए हैं।
कांग्रेस ने गठित की जांच समिति
बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच समिति गठित कर दी है। समिति के संयोजक पूर्व मंत्री और खरसिया विधायक उमेश पटेल होंगे। इस समिति में पांच अन्य विधायक, कांग्रेस नेता सलीम, जिला कांग्रेस अध्यक्ष (ग्रामीण) नगेंद्र नेगी और शहर अध्यक्ष अनिल शुक्ला को शामिल किया गया है।

मौके का निरीक्षण कर देगी रिपोर्ट
कांग्रेस की यह टीम प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करेगी, प्रभावित परिवारों से संवाद करेगी और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी को सौंपेगी। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर सड़क तक उठाने की रणनीति बना सकती है।
राजनीतिक गर्मी बढ़ी, प्रशासन पर उठे सवाल
इस कार्रवाई को लेकर रायगढ़ में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस का कहना है कि यह कार्रवाई मानवीयता के खिलाफ है और गरीब परिवारों को बिना पुनर्वास के उजाड़ा जा रहा है। वहीं, प्रशासन का पक्ष है कि मरीन ड्राइव परियोजना के लिए यह आवश्यक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई है, जिसे पहले ही नोटिस देकर सूचना दी जा चुकी थी।
आगे क्या?
अब निगाहें कांग्रेस की जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है। यह भी देखना होगा कि क्या कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा सत्र में उठाकर सरकार को कटघरे में खड़ा करेगी।