गणपत चौहान
रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ वन मंडल क्षेत्र में इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। भीषण गर्मी के बीच प्यास बुझाने जंगल से भटककर गांव की ओर आए एक मासूम चीतल को कुत्तों के हमले से बचाने के बाद, ग्रामीणों ने ही उसे मारकर उसका मांस आपस में बांट लिया। मुखबिर की सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए वन विभाग की टीम ने 5 आरोपियों को धर दबोचा है, जिन्हें न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना रायगढ़ शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित देलारी गांव की है। बीते 16 अप्रैल की दोपहर एक चीतल पानी की तलाश में गांव के पास स्थित तालाब पहुंचा था। इसी दौरान आवारा कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया।
वहां मौजूद ग्रामीणों ने शुरुआत में चीतल को कुत्तों से बचाया, लेकिन बाद में उनकी नीयत डोल गई। ग्रामीणों ने घायल चीतल की मदद करने या वन विभाग को सूचना देने के बजाय उसे मार दिया और तालाब के पास ही उसके मांस का आपस में बंटवारा कर लिया।
इन आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
वन विभाग ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए छापेमारी की और निम्नलिखित आरोपियों को गिरफ्तार किया है:
- आत्माराम राठिया
- मयाराम राठिया
- हरिचरण साव
- तरुण साव
- मोतीलाल अगरिया
छापेमारी में मिली पकी हुई सब्जी
वन विभाग को जैसे ही मुखबिर से सूचना मिली, टीम ने संदिग्ध ग्रामीणों के घरों पर दबिश दी। तलाशी के दौरान आरोपियों के घर से चीतल के मांस से बनी सब्जी और अन्य अवशेष बरामद किए गए। कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपियों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। उन्होंने बताया कि कुत्तों के हमले से चीतल की मौत होने के बाद उन्होंने मांस बांट लिया था।
कड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई
वन विभाग ने सभी पांचों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 39, 50 और 51 के तहत मामला दर्ज किया है। आज आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
अधिकारियों की अपील: वन विभाग ने क्षेत्र के लोगों से अपील की है कि यदि कोई वन्यजीव रिहायशी इलाकों में घायल अवस्था में या भटकता हुआ मिले, तो उसकी सूचना तत्काल कंट्रोल रूम को दें। वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाना या उनका मांस खाना गैर-जमानती अपराध है।