रायगढ़ /गनपत चौहान/ओडिशा के पुरी की तर्ज पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक नगरी रायगढ़ में भी महाप्रभु जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा उत्सव का शंखनाद हो चुका है। शहर के राजापारा स्थित ऐतिहासिक भगवान जगन्नाथ मंदिर में 29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर पारंपरिक ‘देवस्नान पूर्णिमा’ का भव्य आयोजन किया गया। इस अलौकिक अनुष्ठान को देखने और भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस महास्नान के साथ ही आगामी रथ महोत्सव की तैयारियां भी आधिकारिक रूप से शुरू हो गई हैं।
108 स्वर्ण कलशों के सुगंधित जल से हुआ महाअभिषेक
सनातन परंपरा के अनुसार, ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ का मुख्य वार्षिक स्नान उत्सव (स्नान यात्रा) मनाया जाता है। राजापारा मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच भगवान जगन्नाथ, उनके अग्रज भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा के विग्रहों को गर्भगृह से बाहर लाकर ‘स्नान मंडप’ पर सुशोभित किया गया।
इसके बाद ‘स्वर्ण कूप’ (पवित्र कुएं) से लाए गए 108 कलशों के जल से भाई-बहन का महाअभिषेक किया गया। इस जल को विशेष रूप से चंदन, कपूर, केसर, गंगाजल और कई दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटियों को मिलाकर अत्यंत सुगंधित और पवित्र बनाया गया था।
भक्तों को निहाल कर गया भगवान का अलौकिक ‘गज वेश’
इस महास्नान अनुष्ठान का सबसे मुख्य और अनूठा आकर्षण भगवान का ‘गज वेश’ (हाथी का रूप) रहा। महाअभिषेक संपन्न होने के बाद, भगवान जगन्नाथ और भाई बलभद्र को बुद्धि के देवता भगवान गणेश के प्रतीक के रूप में हाथी का भव्य मुकुट और सुंदर वस्त्र धारण कराए गए। गज वेश में महाप्रभु के इस अलौकिक और दुर्लभ रूप के दर्शन पाकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा मंदिर परिसर “जय जगन्नाथ” के जयकारों से गूंज उठा।
आज से 15 दिनों के अज्ञातवास (बीमार) में रहेंगे भगवान
धार्मिक मान्यताओं और कपाट परंपरा के अनुसार, ज्येष्ठ की कड़कती धूप में इस महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और देवी सुभद्रा को ‘ज्वर’ (बुखार) आ जाता है, अर्थात वे बीमार पड़ जाते हैं। यही कारण है कि आज (30 जून) से भगवान अगले 14 से 15 दिनों के लिए ‘अनवसर घर’ (एकांत कक्ष यानी अज्ञातवास) में चले गए हैं।
इस दौरान मंदिर के कपाट आम भक्तों के लिए पूरी तरह बंद रहेंगे। अज्ञातवास के दौरान राजवैद्य द्वारा भगवान का गुप्त रूप से आयुर्वेदिक उपचार किया जाएगा, जिसमें उन्हें विशेष जड़ी-बूटियों का काढ़ा, दशांग लेप और सात्विक पथ्य का भोग लगाया जाएगा।
’नवयौवन दर्शन’ के बाद 16 जुलाई को निकलेगी भव्य रथयात्रा
14 दिनों के एकांतवास और जड़ी-बूटियों के उपचार के बाद भगवान पूरी तरह स्वस्थ होकर ‘नवयौवन रूप’ में भक्तों के सामने प्रकट होंगे। रथयात्रा से ठीक एक दिन पहले भक्त भगवान के इस नवयौवन रूप के दर्शन कर सकेंगे। इसके बाद, आगामी 16 जुलाई को शहर में भव्य और ऐतिहासिक रथ महोत्सव (रथयात्रा) का आयोजन किया जाएगा, जिसमें महाप्रभु जगन्नाथ अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) के लिए रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। मंदिर समिति ने रथयात्रा के सुचारू संचालन के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं।