राम मंदिर दान विवाद: योगी सरकार की SIT का बड़ा धमाका, संजय सिंह को भेजा समन।
आरोप लगाने वाले ही अब जांच के दायरे में? संजय सिंह को लखनऊ मुख्यालय में होना होगा पेश।
यूपी में सियासी भूचाल: अयोध्या जमीन सौदे को लेकर ‘आप’ सांसद से पूछताछ करेगी विशेष टीम।
लखनऊ/ गौरव कोचर
अयोध्या राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए दान और जमीन खरीद-बिक्री में कथित हेरफेर के मामले में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) ने इस मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को लखनऊ तलब किया है।
एसआईटी ने संजय सिंह को नोटिस जारी कर तय समय सीमा के भीतर व्यक्तिगत रूप से पेश होने और अपने दावों से जुड़े सबूत सौंपने का आदेश दिया है। इस कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक की सियासत गरमा गई है।
जांच के दायरे में क्यों आए संजय सिंह?
दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीनों में भारी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।
SIT इन 3 मुख्य बिंदुओं पर करेगी पूछताछ:
- साक्ष्यों की मांग: संजय सिंह ने दावा किया था कि जो जमीन कुछ मिनट पहले महज 2 करोड़ रुपये में खरीदी गई थी, उसे मंदिर ट्रस्ट ने 18.5 करोड़ रुपये में खरीदा। SIT अब इन दावों से जुड़े मूल दस्तावेज और सबूत मांग रही है।
- बयान दर्ज करना: जांच एजेंसी संजय सिंह का आधिकारिक बयान दर्ज करेगी ताकि आरोपों के पीछे के तथ्यों की कानूनी जांच की जा सके।
- क्रॉस-वेरिफिकेशन: इस मामले में रजिस्ट्री विभाग, जमीन के मूल मालिकों और ट्रस्ट के पदाधिकारियों से मिले इनपुट का संजय सिंह के बयानों से मिलान किया जाएगा।
योगी सरकार का रुख: “आस्था से खिलवाड़ और झूठे आरोप बर्दाश्त नहीं”
योगी सरकार के करीबी सूत्रों के मुताबिक, सरकार का मानना है कि राम मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है। ऐसे में बिना तथ्यों के केवल राजनीतिक लाभ के लिए आरोप लगाना या भ्रम फैलाना गंभीर अपराध है।
”यदि किसी के पास भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत हैं, तो वह जांच एजेंसी को सौंपे और जांच में सहयोग करे। लेकिन अगर यह सिर्फ छवि धूमिल करने की राजनीतिक साजिश निकली, तो कानून अपना काम सख्ती से करेगा।”
— सरकारी सूत्र
सियासी घमासान: वार-पलटवार तेज
इस समन के बाद भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है:
- आम आदमी पार्टी (AAP) का दावा: “संजय सिंह ने राम मंदिर के नाम पर हो रहे घोटाले को उजागर किया था। योगी सरकार सच को सामने लाने के बजाय एजेंसियों का डर दिखाकर विपक्ष की आवाज दबाना चाहती है। हम जांच से डरने वाले नहीं हैं।”
- भाजपा (BJP) का पलटवार: “संजय सिंह सिर्फ ‘हिट एंड रन’ की राजनीति करते हैं—आरोप लगाओ और भाग जाओ। अगर उनके पास वाकई कोई सबूत हैं, तो वे एसआईटी के सामने जाने से क्यों डर रहे हैं? अब उन्हें कानून को जवाब देना होगा।”
एसआईटी के इस एक्शन के बाद अब सबकी नजरें लखनऊ पर टिकी हैं। संजय सिंह तय तारीख पर एसआईटी के सामने पेश होते हैं या फिर कानूनी राहत के लिए अदालत का रुख करते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। इस पूछताछ के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर उत्तर प्रदेश पुलिस आगे की बड़ी कानूनी कार्रवाई कर सकती है।