रामनवमी के पवित्र अवसर पर महान भविष्यवेत्ता बाबा-भागलपुर का जन्मदिन, भक्ति और भविष्यवाणी का मिलन
| लोकेंद्र सिंह शेखावत
भागलपुर, बिहार। आज के दौर में भारतीय हर क्षेत्र में अपना बेहतरीन योगदान कर अपने देश का सर पूरी दुनिया में गर्व से ऊँचा कर रहे हैं। आज हमारे देश के कई ऐसे महान पुरुष है जिन्होंने बड़े-बड़े कार्य को पूर्ण किया है। कुछ ऐसे ही महान लोगों की सूची में आते है बाबा-भागलपुर, इनके बारे में जितना कहा जाए वो कम होगा क्योंकि इनके बारे में कोई वर्णन नहीं कर सकता। यह व्यक्ति महान एवं सर्वश्रेष्ठ लोगों की गिनती में आते हैं। महान शब्द का प्रयोग उनके लिए किया जाता है जिन्होंने उत्तम कार्य किए हो या ऐसा काम किया हो जो कोई नहीं कर सकता है। उनमें से एक है बाबा-भागलपुर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त दैवज्ञ पं.आर. के. चौधरी, जिन्हें आज लोग बाबा-भागलपुर के नाम से जानते हैं।
उनका जन्म चैत्र शुक्ल, नवमी विक्रम संवत 2032-33 हिन्दू पंचाग के अनुसार हुआ था। इसलिए रामनवमी को बाबा-भागलपुर का जन्मदिन मनाया जाता है।
ज्योतिष के रास्ते चलते हुए स्वमेव ही बाबा-भागलपुर तंत्र विद्या की ओर उन्मुख हो गये। गहराई तक उतरते हुए उन्होंने साधना के दौरान अपने साधना स्थल पर अपनी कुलदेवी माँ काली के उग्रस्वरूप माँ उग्रकालिका को स्थापित कर दिया। समस्त जग को प्रकाश संचारित करने की कामना के साथ अखंड दीप जलाया। आये दिन अपने कष्ट निवारण के लिए पहुँचे लोगों को यथासंभव संतुष्ट कर विदा करते हैं।
बिहार राज्य के सहरसा जिले के बनगाँव ग्राम के मूल निवासी बाबा-भागलपुर, वर्तमान में आदमपुर के बैंक कॉलोनी में रहते हैं। अपनी युवावस्था के प्रारंभिक काल से ही पढाई और नौकरी के सिलसिले में पंडितजी घर से बाहर ही रहे। सेवा देने के क्रम में उनको वाराणसी जाने का अवसर मिला। अपने वाराणसी प्रवास के दौरान ही एक दिन जब वह दशमेश घाट पर भ्रमण कर रहे थे तो संयोगवश एक अघोरी तांत्रिक से मुलाकात हो गई। वाकया वर्ष 1996-1997 के आसपास का था। तांत्रिक से मिलने के बाद बाबा ने भागलपुर में ही स्थायी रूप से रहने का निश्चय किया। आखिरकार, वर्ष 2003 ई. से भागलपुर में स्थायी रूप से रहने लगे। माँ उग्रकालिका की तस्वीर को स्थापित कर देवी की साधना में पूर्ण रूप से रत हो गये। जग कल्याण के लिए अखंड दीप जलाया। वर्ष 2003 से 2008 ई. तक उनका साधना क्रम अनवरत चलता रहा। उनकी कुलदेवी माता काली के अतिरिक्त बाबा की इष्ट माँ कामाख्या और आराध्य माँ बगलामुखी हैं, जिनकी आराधना के लिए शिव के मृत्युंजय रूप की साधना करनी पड़ती है। संसार को खराब ग्रह दशा से तारने के लिए हर वर्ष नवरात्र के दौरान बाबा-भागलपुर मौन व्रत धारण करते हैं। वर्ष 2020 के भीषण कोरोना काल में उन्होंने तीन माह तक अनवरत मौन व्रत धारण किया था।
साथ ही सांसारिक, राजनीतिक व धार्मिक-आध्यात्मिक गतिविधियों पर भी बाबा-भागलपुर की आलेख और भविष्यवाणी प्रकाशित होती रहती हैं। पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का पत्ता साफ हो जाएगा की भविष्यवाणी की थी। उनका पहला लेख परम न्यायाधीश शनिदेव, स्थानीय दैनिक नई बात में प्रकाशित हुई थी। बाबा-भागलपुर की प्रथम भविष्यवाणी 2003 ई. में प्रकाशित हुई थी जिसका शीर्षक:- मायावती सरकार गिर जाएगी और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री होंगे। ये वह व्यक्ति हैं जिसने 16 जून, 2016 को भविष्यवाणी की थी कि हरीश रावत फ्लोर टेस्ट पास करेंगे तथा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। गुजरात के मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल की जगह नया चेहरा गुजरात के मुख्यमंत्री के पद पर विराजमान होंगे। टी -20 क्रिकेट मैच, सनराइजर्स हैदराबाद फाइनल मैच, 15 अगस्त 2016 को बाबा-भागलपुर ने बिहार प्रदेश के राजनीति में उथल-पुथल की भविष्यवाणी (महागठबंधन सरकार) फेसबुक पोस्ट में की थी। इतना ही नहीं 09 मार्च 2019 (शनिवार) को प्रकाशित भविष्यवाणी जिसका शीर्षक:- ग्रहों के खेल में ट्रम्प को दिख सकते हैं दिन में ही तारे!
उपांकित सभी भविष्यवाणी शत-प्रतिशत सही साबित हुई। 2003 ई. से अब तक अनेकानेक (एक-दो को छोड़कर) भविष्यवाणी सही साबित हुई है और हो रही है। इनकी अनवरत साधना और कठोर तपस्या आज के दौर में इतनी रंग लाई है। फलत: आमजनों का श्रद्धा-विश्वास इन पर हैं क्योंकि जो डॉक्टर नहीं कर सकता वो यह कर दिखाने की क्षमता रखते है। जहाँ डॉक्टर बीमारियों की दवाई की सूची देते है वहाँ ये व्यक्ति की बीमारियों को पल भर में दूर कर देते है। ऐसे महान एवं जगत कल्याणकारी महापुरुष को कोटी- कोटि नमन।
