राधा विहार कॉलोनी विवाद: विकास समिति ने जेडीए पर लगाए गंभीर आरोप, यूडीएच मंत्री को सौंपा ज्ञापन
जयपुर, रविवार
Edited By : लोकेंद्र सिंह शेखावत
टेलीग्राफ टाइम्स
जून 15,2025
जयपुर की राधा विहार कॉलोनी को लेकर नगरीय विकास न्यास (जेडीए) पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। रविवार को राधा विहार विकास समिति ने नगरीय विकास एवं आवास मंत्री झाबर सिंह खर्रा को ज्ञापन सौंपकर जेडीए अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए।
जेडीए की मिलीभगत से जारी हुआ 90ए आदेश: समिति का आरोप
ज्ञापन में समिति ने बताया कि राधा विहार कॉलोनी में पिछले कई वर्षों से लोग मकान बनाकर रह रहे हैं। कॉलोनी की नियमितीकरण प्रक्रिया के तहत वर्ष 2017 में कॉलोनी अनुमोदन की फाइल जेडीए में विधिवत रूप से जमा की गई थी, जो अब तक लंबित है। इसके बावजूद, समिति का आरोप है कि जेडीए अधिकारियों ने एक फर्जी योजना का हवाला देते हुए उसी कॉलोनी के लिए नई 90ए प्रक्रिया को मंजूरी दे दी।
समिति ने इस कार्यवाही को ‘पूरी तरह मिलीभगत का नतीजा’ बताया है। उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारियों ने भू-माफिया और निजी स्वार्थों के दबाव में आकर नियमों को ताक पर रख दिया, जिससे पारदर्शिता और वैधानिक प्रक्रिया को ठेंगा दिखाया गया।
ज्ञापन में उठाई गई मुख्य मांगें:
- 2017 से लंबित कॉलोनी की मूल फाइल को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाए।
- फर्जी योजना के आधार पर जारी 90ए आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।
- इस प्रक्रिया में संलिप्त जेडीए अधिकारियों व कर्मचारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
मंत्री झाबर सिंह खर्रा का आश्वासन: होगी निष्पक्ष जांच
यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने समिति की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उचित जांच का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा:
“राधा विहार कॉलोनीवासियों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और यदि जेडीए में किसी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
मंत्री ने यह भी आश्वस्त किया कि राज्य सरकार जनता की समस्याओं के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और ऐसे मामलों में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्थानीय निवासियों में रोष, पारदर्शिता की मांग
राधा विहार के निवासियों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि एक वैध प्रक्रिया के तहत वर्षों से लंबित फाइल को दरकिनार कर दी गई और एक कागजी योजना को प्राथमिकता देकर आमजन के साथ धोखा किया गया है।

