रातल्या गांव में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा: STP पाइपलाइन लीकेज से नरकीय हुआ जीवन,

अब हाईकोर्ट की शरण में ग्रामीण

| योगेश शर्मा

जयपुर, 24 फरवरी 2026 बगरू विधानसभा क्षेत्र के डिग्गी-मालपुरा रोड स्थित रातल्या गांव के निवासी पिछले 20 दिनों से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की टूटी पाइपलाइन और उससे निकलने वाले सड़ांध मारते पानी के कारण बेहद परेशान हैं। प्रशासन और संबंधित एसोसिएशन की अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने प्रदूषण मंडल के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और अब इस मामले को राजस्थान उच्च न्यायालय ले जाने का निर्णय लिया है।

प्रमुख समस्याएं: बीमारी और बदबू का साया

​ग्रामीणों का आरोप है कि आबादी क्षेत्र और सरकारी विद्यालय के पास बने इस प्लांट ने पूरे गांव का वातावरण दूषित कर दिया है। वर्तमान स्थिति अत्यंत चिंताजनक है:

  • बीमारियों का खतरा: दूषित पानी के जमाव से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे छोटे बच्चे बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
  • रास्ते बंद: मुख्य रास्ते पर गंदा पानी भरने से ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है।
  • अनदेखी: स्थानीय निवासियों ने एसटीपी एसोसिएशन को कई बार अवगत कराया, लेकिन लीकेज ठीक करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।

विवाद की पृष्ठभूमि: दवाब में बना था प्लांट

​स्थानीय निवासी दिनेश बागड़ा ने बताया कि करीब दो वर्ष पूर्व जब इस एसटीपी प्लांट की स्थापना की जा रही थी, तब ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया था। आरोप है कि उस समय जेडीए (JDA) और एसटीपी एसोसिएशन ने कानून और लाठी की धमकियां देकर जबरन आबादी भूमि के पास इस प्लांट को स्थापित कर दिया। अब इसका खामियाजा पूरे गांव को भुगतना पड़ रहा है।

फ़ोटो टेलीग्राफ टाइम्स

अब ‘जनहित याचिका’ का सहारा

​प्रदूषण मंडल, फैक्ट्री संचालकों और एसोसिएशन की कार्यप्रणाली से त्रस्त होकर ग्रामीणों ने अब कानूनी लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है।

    • गुरुवार को होगी कार्रवाई: ग्रामीण गुरुवार को राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर खंडपीठ में जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे।
    • कोर्ट स्टे की मांग: याचिका के माध्यम से कोर्ट से इस समस्या के समाधान और प्लांट के संचालन पर ‘स्टे’ (स्थगन आदेश) के लिए प्रार्थना पत्र दिया जाएगा।

ग्रामीणों का पक्ष: “हम नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। कल-कारखानों का केमिकल युक्त और बदबूदार पानी हमारे घरों के बाहर जमा है। प्रशासन सुन नहीं रहा, इसलिए अब हमें न्यायपालिका से ही उम्मीद है।” – दिनेश बागड़ा, स्थानीय निवासी

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