राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का तीसरा दिन लोक-संगीत और संस्कृति को समर्पित

राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का तीसरा दिन लोक-संगीत और संस्कृति को समर्पित

भपंग वादन, चंग की थाप, बांसुरी की सुरीली धुन और कठपुतली शो रहे आकर्षण का केंद्र

मकरंद देशपांडे ने कठपुतली कला को बताया अद्भुत और अलौकिक

| नरेश गुनानी

जयपुर, 18, दिसम्बर।
सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की ओर से राज्य सरकार के कार्यकाल के सफल दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जवाहर कला केन्द्र में 15 दिसम्बर से आयोजित राज्य स्तरीय प्रदर्शनी के तीसरे दिन बुधवार को सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। यह संध्या प्रदेश की समृद्ध लोक-संगीत एवं सांस्कृतिक विरासत को समर्पित रही, जिसमें भपंग वादन, चंग की थाप, बांसुरी की मधुर धुनों और कठपुतली कला ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

पर्यटन विभाग के सहयोग से आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में यूसुफ खां एवं उनके समूह ने भपंग वादन के माध्यम से “कैसो आ गयो जमानो रे” और “दुनिया में भाया देख ले” जैसे लोकप्रिय लोकगीतों की प्रभावशाली प्रस्तुति दी, जिस पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। वहीं चूरू के श्याम मित्र मंडल ने चंग की जोशीली थाप और बांसुरी की सुरीली तान के साथ लोकधुनों की प्रस्तुति देकर पूरे परिसर को लोक रंगों से सराबोर कर दिया।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण प्रसिद्ध कठपुतली लोक कलाकार राजू भाट रहे। उन्होंने ढोलक की थाप पर उंगलियों के सहारे काठ की पुतलियों को नचाते हुए महाराजा अमरसिंह की कहानी को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को लोककथा की दुनिया में पहुंचा दिया और कठपुतली कला की बारीकियों से रूबरू कराया।

प्रदर्शनी का अवलोकन करने पहुंचे बॉलीवुड अभिनेता, लेखक एवं निर्देशक मकरंद देशपांडे ने कठपुतली कला की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि लोक कलाओं को संजोकर रखना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की ओर से नि:शुल्क प्रस्तुत की जा रही यह कला प्रदर्शनी सराहनीय पहल है और कठपुतली कला वास्तव में अद्भुत एवं अलौकिक अनुभूति कराती है।

इस अवसर पर सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की संयुक्त निदेशक क्षिप्रा भटनागर ने मकरंद देशपांडे का डीआईपीआर की ओर से किट भेंट कर स्वागत किया तथा मंच पर उपस्थित कलाकारों को सम्मानित किया।

कार्यक्रम से पूर्व राजस्थान प्रशासनिक सेवा की अधिकारी क्षिप्रा शर्मा ने किस्सागोई कला के अंतर्गत मोर और मोरनी की लोककथा सुनाकर श्रोताओं को कथा संसार में ले जाने का सफल प्रयास किया। इसके अतिरिक्त “टीवी, रेडियो और सोशल मीडिया के क्षेत्र में अवसर और चुनौतियाँ” विषय पर आयोजित पैनल डिस्कशन में थिएटर आर्टिस्ट एवं आरजे प्रियदर्शिनी मिश्रा, निधीश गोयल और सुमित ने युवाओं को अपनी प्रतिभा पहचानने और उसी के अनुरूप करियर चयन का संदेश दिया।

कार्यक्रम के समापन पर सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की ओर से सभी कलाकारों को सम्मानित किया गया। इस दौरान विभाग की सहायक निदेशक कविता जोशी ने राज्य स्तरीय प्रदर्शनी की रूपरेखा और गतिविधियों की विस्तृत जानकारी भी दी।

 

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