राज्य स्तरीय पंच गौरव समिति की प्रथम बैठक सम्पन्न — मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा
जयपुर, 08 सितम्बर 2025। लोकेंद्र सिंह शेखावत। टेलीग्राफ टाइम्स।
सचिवालय में सोमवार को मुख्य सचिव सुधांश पंत की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय पंच गौरव समिति की प्रथम बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में पंच गौरव कार्यक्रम की प्रगति, जिला स्तरीय कार्ययोजनाओं एवं नोडल विभागों के प्रस्तावों की समीक्षा की गई। साथ ही चयनित जिलों को बजट आवंटन और पुनर्विनियोजन से जुड़े विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन और सतत मॉनिटरिंग के लिए राज्य और जिला स्तर पर समितियाँ सक्रिय रहें तथा उपखण्ड स्तर पर नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं को समयबद्ध कार्ययोजना के अनुसार लागू किया जाए, विभागों के बीच बेहतर समन्वय हो और पंचायत स्तर तक विशेष अभियान चलाकर अधिक से अधिक लाभार्थियों तक पहुँच बनाई जाए। इसके साथ ही वित्तीय प्रावधानों और बजट उपयोग की नियमित समीक्षा कर कार्यक्रम का लाभ समय पर और पारदर्शी ढंग से जनता तक पहुँचाना सुनिश्चित किया जाए।
आयोजना विभाग के निदेशक विनेश सिंघवी ने बताया कि पंच गौरव कार्यक्रम को राज्य सरकार ने फ्लैगशिप योजना घोषित किया है। सभी जिलों से कार्ययोजनाएँ प्राप्त कर संबंधित विभागों से परीक्षण करवाया जा चुका है। उन्होंने जानकारी दी कि बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इनमें जिला स्तरीय समितियों से प्राप्त ₹406 करोड़ की कार्ययोजनाएँ, नोडल विभाग की अनुशंसा पर ₹86.18 करोड़ का बजट आवंटन, तथा ₹100 करोड़ के प्राविधिक बजट का पुनर्विनियोजन प्रमुख रहे।
इसके साथ ही प्रत्येक संभाग के जिलों को ₹50 लाख और अन्य जिलों को ₹25 लाख अनटाइड फंड उपलब्ध कराने पर निर्णय लिया गया। विभिन्न गौरव घटकों — उपज, वनस्पति प्रजाति, उत्पाद, पर्यटन स्थल और खेल — के लिए जिला एवं विभाग स्तर पर विस्तृत अनुमोदन भी स्वीकृत किए गए हैं, ताकि कार्यक्रम का क्रियान्वयन तेजी से आगे बढ़ सके।
पंच गौरव कार्यक्रम की शुरुआत 17 दिसम्बर 2024 को हुई थी और वर्ष 2025-26 की बजट घोषणा संख्या 22 (1) के अंतर्गत इसे मंजूरी दी गई। इसके लिए ₹550 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। योजना का उद्देश्य प्रत्येक जिले की विशिष्ट पहचान स्थापित करना, स्थानीय संसाधनों को प्रोत्साहित करना, रोजगार सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम के पाँच प्रमुख घटक — उपज, वनस्पति प्रजाति, उत्पाद, पर्यटन स्थल और खेल — के लिए क्रमशः कृषि विभाग, वन विभाग, उद्योग विभाग, पर्यटन विभाग और खेल विभाग को नोडल विभाग नामित किया गया है। इन क्षेत्रों में मानकीकरण, प्रशिक्षण, ब्रांड बिल्डिंग, डिजिटल प्रचार-प्रसार और जनभागीदारी के माध्यम से कार्यक्रम को जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रत्येक जिले की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करना है।
बैठक में पर्यटन एवं कला संस्कृति के प्रमुख शासन सचिव राजेश कुमार यादव, वित्त के प्रमुख शासन सचिव वैभव गालरिया, युवा एवं खेल विभाग के शासन सचिव नीरज के पवन, कृषि एवं उद्यानिकी आयुक्त चिन्मयी गोपाल और वन विभाग की अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक टी जे कविथा सहित विभिन्न नोडल विभागों और संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।