जयपुर/ योगेश शर्मा/प्रदेश में स्थानीय निकाय एवं पंचायत चुनावों में ओबीसी (OBC) आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। ओबीसी एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य एवं अखिल भारतीय कांग्रेस ओबीसी विभाग के पूर्व नेशनल कोऑर्डिनेटर राजेन्द्र सेन ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार संविधान की मूल भावना के अनुरूप ओबीसी वर्ग को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने में विफल रही है और कई क्षेत्रों में निर्धारित कोटे से भी कम आरक्षण दिया जा रहा है।
जनसंख्या और प्रतिनिधित्व का गणित
राजेन्द्र सेन ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग के अनुसार प्रदेश में ओबीसी की आबादी लगभग 3.80 करोड़ आंकी गई है, जो कुल अनुमानित आबादी का करीब 45 प्रतिशत है। वहीं, कई प्रमुख सामाजिक संगठनों का आकलन है कि प्रदेश में ओबीसी की यह आबादी 55 प्रतिशत से भी अधिक है। ऐसे में स्थानीय निकायों और पंचायतों में इस वर्ग को उसकी वास्तविक संख्या के आधार पर पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
- पंचायतों व निकायों का दायरा: प्रदेश में कुल 14,403 ग्राम पंचायतें तथा 309 नगरीय निकाय हैं, जिनमें कुल 10,245 वार्ड आते हैं।
- संभावित आंकड़े: उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, लगभग ढाई हजार सरपंच पद और करीब 1,800 पार्षद सीटें ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित होने की संभावना बनती है।
- आरक्षण का अंतर: कुल पंचायतों और निकायों का 21 प्रतिशत हिस्सा 3,024 और वार्डों का 21 प्रतिशत 2,151 होता है। इसके बावजूद सरकार द्वारा कई स्थानों पर 21 प्रतिशत आरक्षण का लाभ भी सुचारू रूप से नहीं दिए जाने पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।
पूर्व चुनावों में रहा है मजबूत प्रदर्शन
”पूर्व के निकाय और पंचायत चुनावों के आंकड़े गवाह हैं कि करीब 40 प्रतिशत सीटों पर ओबीसी उम्मीदवार विजयी होकर आए हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि आरक्षित सीटों के अलावा सामान्य वर्ग की सीटों पर भी ओबीसी उम्मीदवारों का प्रदर्शन हमेशा से बेहतरीन रहा है।”
— राजेन्द्र सेन, सदस्य, ओबीसी एडवाइजरी काउंसिल
प्रमुख मांगें
राजेन्द्र सेन ने राज्य सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
- स्पष्टीकरण और पारदर्शिता: जिन निकायों और पंचायतों में ओबीसी आरक्षण 21 प्रतिशत से कम निर्धारित किया गया है, सरकार वहां इसका स्पष्ट आधार सार्वजनिक करे।
- न्यायसंगत प्रतिनिधित्व: संविधान की भावना और वास्तविक जनसंख्या के आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए ओबीसी वर्ग को न्यायपूर्ण राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।