राज्य सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने पर विशेष

राज्य सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने पर विशेष
नव उत्थान–नई पहचान, बढ़ता राजस्थान–हमारा राजस्थान
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में डेयरी क्षेत्र में बने नए कीर्तिमान
ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त, पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों को मिला संबल

19 दिसम्बर 2025, 06:35 PM। जयपुर, 

| सुनील शर्मा

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल और दूरदर्शी नेतृत्व में प्रदेश का डेयरी क्षेत्र बीते दो वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है। डेयरी क्षेत्र अब केवल पारंपरिक व्यवसाय तक सीमित न रहकर तकनीक-आधारित, संगठित और आर्थिक रूप से मजबूत उद्योग के रूप में विकसित हो रहा है। राज्य सरकार की योजनाबद्ध नीतियों के चलते ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और लाखों पशुपालकों व दुग्ध उत्पादकों को स्थायी संबल प्राप्त हुआ है।

राज्य सरकार द्वारा दुग्ध उत्पादकों को आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे यह वर्ग आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

5 लाख किसानों को 1172 करोड़ रुपये का अनुदान

प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के अंतर्गत बीते दो वर्षों में लगभग 5 लाख किसानों को कुल 1172 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है। इस योजना ने पशुपालकों की आय बढ़ाने और डेयरी व्यवसाय को लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इसके अतिरिक्त सरस सामूहिक आरोग्य बीमा योजना के तहत दुग्ध उत्पादकों को 3 लाख रुपये तक की बीमा सुरक्षा प्रदान की जा रही है। अब तक लगभग 34 हजार दुग्ध उत्पादकों को इस योजना के अंतर्गत बीमित किया जा चुका है, जिससे उन्हें आकस्मिक परिस्थितियों में आर्थिक सुरक्षा मिली है।

बेटियों की शादी के लिए 21 हजार रुपये की सहायता

राज्य सरकार द्वारा सरस मायरा योजना की शुरुआत की गई है, जिसके तहत दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति के सदस्य की बेटी की शादी के अवसर पर 21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह योजना सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ ग्रामीण परिवारों को सम्मानजनक सहयोग प्रदान कर रही है।

आरसीडीएफ और जिला दुग्ध संघों का टर्नओवर 47 वर्षों में सर्वाधिक

राज्य सरकार के प्रभावी प्रयासों के परिणामस्वरूप राजस्थान सहकारी डेयरी संघ (आरसीडीएफ) का वार्षिक टर्नओवर 8 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 10 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। आरसीडीएफ और जिला दुग्ध संघों का कुल लाभ और टर्नओवर पिछले 47 वर्षों के इतिहास में सर्वाधिक रहा है।

टर्नओवर में हुई इस अभूतपूर्व वृद्धि का सीधा लाभ डेयरी क्षेत्र और दुग्ध उत्पादकों को मिला है। वार्षिक लाभ में लगभग 44 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। कुशल प्रबंधन और संसाधनों के समुचित उपयोग के चलते वर्षों से घाटे में चल रही 15 दुग्ध इकाइयां अब मुनाफे में आ चुकी हैं।

डेयरी क्षमता 54 लाख लीटर, 70 लाख लीटर का लक्ष्य

प्रदेश में डेयरी व्यवस्था की क्षमता 48 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़कर 54 लाख लीटर प्रतिदिन हो गई है। आगामी दो वर्षों में इस क्षमता को बढ़ाकर 70 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिस दिशा में तेज गति से कार्य किया जा रहा है। इससे न केवल डेयरी सेक्टर का विस्तार होगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

प्रदेश में 2185 नए प्रस्तावित दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति एवं दुग्ध संकलन केंद्र प्रारंभ किए गए हैं। इसके साथ ही 788 नई पंजीकृत दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों के माध्यम से 48 हजार 376 नए दुग्ध उत्पादक एवं पशुपालक सदस्य जोड़े गए हैं।

श्वेत क्रांति 2.0 के तहत ऑनलाइन पंजीकरण

प्रदेश में श्वेत क्रांति 2.0 के अंतर्गत प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया 17 जुलाई 2025 से शुरू की गई है। अब समितियां ऑनलाइन पंजीकरण कर आसानी से अपना कार्य प्रारंभ कर सकती हैं, जिससे पारदर्शिता और गति दोनों में सुधार हुआ है।

विद्यालयों और आंगनबाड़ियों को 14,751 मैट्रिक टन स्किम्ड मिल्क पाउडर

पन्नाधाय बाल-गोपाल योजना के तहत प्रदेश के लगभग 67 हजार राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए 12 हजार 508 मैट्रिक टन स्किम्ड मिल्क पाउडर की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। वहीं मुख्यमंत्री अमृत आहार योजना (आंगनबाड़ी दुग्ध वितरण योजना) के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को 2 हजार 243 मैट्रिक टन स्किम्ड मिल्क पाउडर की शत-प्रतिशत आपूर्ति की गई है। इस प्रकार कुल 14 हजार 751 मैट्रिक टन स्किम्ड मिल्क पाउडर बच्चों तक पहुंचाया गया है।

‘दूध का दूध और पानी का पानी’ अभियान

उपभोक्ताओं को गुणवत्तायुक्त दूध उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार द्वारा ‘दूध का दूध एवं पानी का पानी अभियान’ चलाया गया। इस अभियान के तहत 24 हजार 731 से अधिक दूध के सैम्पलों की जांच की गई, जिससे गुणवत्ता सुनिश्चित करने में प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है।

 

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