नई दिल्ली/ नरेश गुनानी/देश में प्रतियोगी और सार्वजनिक परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और नकल के मामलों पर लगाम लगाने के लिए संसद ने एक कड़ा कदम उठाया है। राज्य सभा ने गुरुवार को भारी हंगामे, तीखी बहस और विपक्षी दलों के वॉकआउट के बीच ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया।
लोक सभा से पहले ही पारित हो चुके इस विधेयक को अब संसद के दोनों सदनों की मंजूरी मिल गई है। संसद की मुहर लगने के बाद अब इसे अंतिम स्वीकृति के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा।
इस नए विधेयक का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों, पेपर लीक और संगठित नकल माफिया के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करना है।
- कड़ी सजा का प्रावधान: पेपर लीक या परीक्षाओं में धांधली में शामिल पाए जाने वाले दोषियों के लिए भारी जुर्माने के साथ-साथ लंबे कारावास का प्रावधान किया गया है।
- संगठित अपराध पर कसता शिकंजा: किसी भी कोचिंग संस्थान, परीक्षा एजेंसी या संगठित गिरोह द्वारा किए गए अपराधों को गैर-जमानती और कड़ा अपराध माना जाएगा।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: परीक्षाओं का आयोजन कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय की गई है, ताकि भविष्य में छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न हो सके।
उच्च सदन में हंगामा और विपक्ष का वॉकआउट
गुरुवार को जब विधेयक को चर्चा और पारित कराने के लिए सदन के पटल पर रखा गया, तो विपक्षी सदस्यों ने इस पर जमकर हंगामा किया।
- विपक्ष का रुख: विपक्ष का आरोप था कि इस विधेयक में कई तरह की खामियां हैं और इस पर विस्तृत चर्चा या इसे प्रवर समिति (Select Committee) को भेजा जाना चाहिए। विपक्ष ने सरकार पर छात्रों के मुद्दों से जुड़े बुनियादी सवालों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।
- सत्ता पक्ष की दलील: सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि लाखों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए यह कड़ा कानून समय की मांग है।
सदन में तीखी बहस और नारेबाजी के बीच जब सरकार विधेयक को पारित कराने की प्रक्रिया में आगे बढ़ी, तो विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। इसके बाद सदन ने ध्वनि मत से इस विधेयक को मंजूरी दे दी।
युवाओं के भविष्य के लिए बड़ा कदम
बीते कुछ वर्षों में विभिन्न राज्यों और केंद्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली परीक्षाओं के पेपर लीक होने से करोड़ों परीक्षार्थियों का समय और भविष्य दांव पर लगा है। इस नए विधेयक से न केवल नकल माफिया पर लगाम लगेगी, बल्कि मेहनत करने वाले छात्रों का भरोसा भी परीक्षा प्रणाली में बहाल होगा।