राज्य में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता — 1.90 लाख टन यूरिया व 1.02 लाख टन डीएपी स्टॉक में, आपूर्ति निरंतर जारी
जयपुर, 21 अगस्त 2025।✍️ नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
राज्य सरकार और कृषि विभाग लगातार उर्वरकों की उपलब्धता पर नजर रखे हुए है। कम उपलब्धता और अधिक खपत वाले जिलों व ब्लॉकों को प्राथमिकता के साथ चिन्हित कर पारदर्शी ढंग से यूरिया और डीएपी का वितरण किया जा रहा है। कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए विभागीय अधिकारी सतर्कता से कार्य कर रहे हैं।
यूरिया की आपूर्ति
- खरीफ 2025 के लिए अप्रैल से अगस्त तक केंद्र सरकार द्वारा 8.82 लाख मैट्रिक टन यूरिया का आवंटन किया गया।
- इसके विरुद्ध अब तक 8.05 लाख मैट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति हो चुकी है।
- शेष 77 हजार मैट्रिक टन यूरिया अगस्त माह के भीतर उपलब्ध करा दिया जाएगा।
डीएपी की स्थिति
- अप्रैल से अगस्त तक केंद्र द्वारा स्वीकृत 4.75 लाख मैट्रिक टन डीएपी में से अब तक 3.25 लाख मैट्रिक टन की आपूर्ति हो चुकी है।
- शेष 27 हजार मैट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति प्रस्तावित है।
वर्तमान स्टॉक
- यूरिया – 1.90 लाख मैट्रिक टन
- डीएपी – 1.02 लाख मैट्रिक टन
- एनपीके – 0.80 लाख मैट्रिक टन
- एसएसपी – 1.84 लाख मैट्रिक टन
विभाग ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार फॉस्फेटिक उर्वरकों का स्टॉक 0.83 लाख मैट्रिक टन अधिक है।
निगरानी और कार्रवाई
कृषि विभाग के अनुसार केंद्र सरकार से महावार और कंपनिवार आवंटन के आधार पर जिलेवार आपूर्ति योजना तैयार की जाती है।
- किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड में अंकित सिफारिशों के अनुसार ही उर्वरकों के उपयोग हेतु प्रेरित किया जा रहा है।
- पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए किसानों को पंक्तिबद्ध कर प्रशासन और विभागीय कार्मिकों की देखरेख में उर्वरक वितरण किया जा रहा है।
- जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश सभी जिलाधिकारियों को दिए गए हैं।
जिला स्तर पर उपलब्धता
- डीग: 2,230 टन यूरिया, 1,510 टन डीएपी, 2,090 टन एनपीके, 4,820 टन एसएसपी
- भरतपुर: 2,808 टन यूरिया, 1,912 टन डीएपी, 2,618 टन एनपीके, 5,574 टन एसएसपी
- बूंदी: 4,912 टन यूरिया, 3,529 टन डीएपी, 2,455 टन एनपीके, 8,173 टन एसएसपी
भरतपुर और अलवर के रैक प्वाइंट पर 20 हजार डीएपी बैग उपलब्ध हैं, जिनमें से लगभग 4 हजार बैग डीग में भेजे जा रहे हैं।
आगे की व्यवस्था
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि खरीफ फसलों में डीएपी की जरूरत नहीं रह गई है। राज्य के कुछ पूर्वी जिलों में किसान सरसों की अगेती बुवाई के लिए अग्रिम डीएपी खरीद रहे हैं, जबकि बुवाई का समय अभी शेष है। रबी सीजन के लिए अलग से पर्याप्त उर्वरक आवंटन किया गया है और उसकी आपूर्ति समय पर सुनिश्चित की जाएगी।

