जयपुर, 9 जुलाई 2026 / गौरव कोचर/राजस्थान में कर चोरों के खिलाफ वाणिज्यिक कर विभाग (राज्य जीएसटी) ने एक बार फिर बड़ा शिकंजा कसा है। विभाग द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत मुख्यालय की प्रवर्तन शाखा-तृतीय (Enforcement Wing-III), जयपुर ने ‘मैसर्स प्रेम ग्रीन प्राइवेट लिमिटेड’ और उससे जुड़ी चार अन्य फर्मों के कई ठिकानों पर एक साथ सर्च (छापेमारी) की कार्रवाई को अंजाम दिया। शुरुआती जांच और डाटा विश्लेषण के आधार पर इन फर्मों द्वारा पिछले 5 सालों में करीब 35 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी किए जाने की गंभीर आशंका जताई गई है।
मेहंदी और ब्यूटी प्रोडक्ट्स का है कारोबार
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस बिजनेस ग्रुप की फर्में मुख्य रूप से मेहंदी पाउडर, मेहंदी कोन, हेयर कलर और अन्य ब्यूटी प्रोडक्ट्स (सौंदर्य उत्पादों) के विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और व्यापार से जुड़ी हैं। ये फर्में स्थानीय स्तर पर सोजत (पाली) से भारी मात्रा में कच्ची मेहंदी की खरीद करती हैं। इसके बाद अलग-अलग उत्पाद तैयार कर उन्हें देश के विभिन्न राज्यों में सप्लाई किया जाता है।
फर्जी बिलों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का खेल
जीएसटी विभाग को खुफिया जानकारी मिली थी कि इस ग्रुप की कंपनियों द्वारा पिछले कुछ वर्षों में अपने ही परिवार के सदस्यों से जुड़ी विभिन्न बोगस/संबंधित फर्मों से बिना किसी वास्तविक माल (Goods) की आपूर्ति के, सिर्फ कागजों पर लेनदेन दिखाकर अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ उठाया जा रहा था। इस तरह फर्जी बिलिंग के जरिए राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुँचाया जा रहा था। जब विभाग ने अपने जीएसटी पोर्टल पर उपलब्ध इन फर्मों के डाटा का गहन विश्लेषण किया, तो पिछले 5 वर्षों में लगभग 35 करोड़ रुपये की कर चोरी का अनुमान सामने आया।
जयपुर और पाली में एक साथ पांच टीमों की छापेमारी
कर चोरी के इस बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए मुख्यालय की प्रवर्तन शाखा-तृतीय ने रणनीति बनाकर पांच विशेष टीमें गठित कीं। इन टीमों ने समूह के पाली और जयपुर स्थित विभिन्न ठिकानों पर एक साथ छापा मारा।
अचानक हुई इस कार्रवाई से व्यवसायियों में हड़कंप मच गया। सर्च ऑपरेशन के दौरान अधिकारियों ने जब मौके पर मौजूद वास्तविक स्टॉक (Physical Stock) का मिलान कंपनी की खाता बहियों (लेखा पुस्तकों) में दर्ज स्टॉक से किया, तो उसमें भारी अंतर (मिसमैच) पाया गया।
मौके पर ही 99.62 लाख रुपये सरकारी खजाने में जमा
स्टॉक में पकड़ी गई इस गड़बड़ी और टैक्स चोरी के सबूत सामने आने के बाद, व्यवसाई ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए तुरंत 99.62 लाख रुपये की राशि टैक्स के रूप में राजकोष (सरकारी खजाने) में जमा करवा दी है।
दस्तावेजों की गहन जांच जारी
जीएसटी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अभी समाप्त नहीं हुई है। मामले में टैक्स चोरी के पूरे तौर-तरीकों को समझने के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की पात्रता, स्टॉक में मिले अंतर, और राज्य के बाहर भेजे गए माल के समर्थन में जारी किए गए ई-वे बिल (E-way Bills) समेत तमाम कंप्यूटर डेटा और दस्तावेजों की बेहद बारीकी और गहनता से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद कर चोरी का यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है।